0 Minutes
बरिंदा से रीता तक का सफर : आपातकाल के झंझावात में दीये की टिमटिमाती लौ के सहारे भूमिगत प्रतिरोध की कहानी(संस्मरण : बृंदा करात, अनुवाद : संजय पराते)
पचास साल पहले, स्वतंत्र भारत को तानाशाही का पहला अनुभव हुआ था। इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल की घोषणा, मौलिक अधिकारों के निलंबन, सभी प्रकार की असहमतियों का निर्मम दमन और एक लाख से अधिक...
Read More