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भगवान के फ़ैसले में देर है, अंधेर नहीं!(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)
चूड़चंद्र ने हठ न छोड़ा। बीते नब्बे दिनों की तरह, इक्यानबे वें दिन भी जब उसने अपने आराध्य के आगे डिक्टाफोन किया और प्रार्थना करने लगा कि प्रभु देश को संकट से बचाएं, अयोध्या...
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