सुरक्षा से ज्यादा विवादों के कारण चर्चित,जोधपुर सेंट्रल जेल में हत्या की आंशका !

*सुरक्षा से ज्यादा विवादों के कारण चर्चित*
*जोधपुर सेंट्रल जेल में हत्या की आंशका !*

जोधपुर। सुरक्षा से ज्यादा विवादों के कारण चर्चाओं में रहने वाले जोधपुर केंद्रीय कारागृह में अब एक और बड़ा कांड हो सकता है, इस बार आशंका मर्डर की है। केंद्रीय कारागृह में कई दिनों से प्रताड़ित हो रहे एक सजायाफ्ता दलित बंदी ने आशंका जताई है कि उसकी हत्या की जा सकती है। हालांकि इस जेल में मारपीट, जबरन वसूली, हत्या प्रयास जैसी वारदाते कोई नई बात नही है।
ताजा विवाद एक सजायाफ्ता बंदी पंकज जीनगर के साथ मारपीट से उपजा है। मूल रूप से सिरोही निवासी और अभी जोधपुर के केंद्रीय कारागृह में सजा भुगत रहे बंदी पंकज जीनगर ने आरोप लगाया कि जेल के जेलर जगदीश पुनिया, स्वरूप सिंह चारण, दिनेश पर्वत व राम किशोर ने उनके साथ बुरी तरह मारपीट की और जातिगत शब्दों से प्रताड़ित किया। यह मामला आठ अप्रैल का बताया जा रहा है, जब जेल बंद होने के बाद ने पंकज व उसके साथी को बैरिक से बाहर निकाला और चीफ जाली में ले जा कर पंकज के साथ निर्ममता से मारपीट की गई। इस दौरान उस को जातिगत शब्दों से प्रताड़ित किया गया।
पंकज ने इस संबंध में जेल अधीक्षक को शिकायत दे कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने का आग्रह किया। इस के बाद जेल प्रशासन उस पर बड़े स्तर पर दवाब बनाना शुरू कर दिया गया। आज ही पंकज ने एक ऑडियो के जरिये बताया कि जेल में उस की हत्या करवाई जा सकती है।
इस से पुर्व पंकज ने बताया था कि जेल में सभी प्रकार के काले कारोबार होते हैं । यहां पर अफीम चरस सहित सभी मादक पदार्थों की बिक्री होती है। इस काले कारोबार को जेल प्रशासन संचालित करता है। पंकज ने बताया कि जेल प्रशासन की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि उसके पास जर्दे की पुड़िया मिली थी। पंकज के अनुसार जेल के जेलर जगदीश पूनिया का कहना है कि अगर इस तरह बंदियों के पास पुड़िया मिलने लगी तो उनका धंधा चौपट हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि जोधपुर के केंद्रीय कारागृह में इस तरह की वारदातें कोई नई बात नहीं है। लगभग इन्हीं हालात के चलते हैं जेल में ही एक जेलर की नृशंस हत्या भी हो चुकी है। इतनी गंभीर वारदातों के बाद भी जेल प्रशासन कोई सबक नहीं ले रहा है।

*दो किलोमीटर का सफर 10 दिनों में पूरा किया रिपोर्ट ने*
जोधपुर के केंद्रीय कारागृह में पंकज जीनगर के साथ हुई मारपीट की रिपोर्ट आखिरकार 10 दिन बाद रातानाडा पुलिस थाना पहुंच गई , इस तरह इस रिपोर्ट को लगभग दो किलोमीटर का रास्ता तय करने में 10 दिनों का समय लग गया।
दरअसल पंकज के साथ ये घटना आठ अप्रैल को हुई थी , इस संबंध में पंकज ने रिपोर्ट पहले ही दे दी थी लेकिन जेल प्रशासन उस पर लगातार दबाव बना रहा था कि वह रिपोर्ट दर्ज नही करवाएं। इसके लिए जेल प्रशासन ने साम-दाम-दंड-भेद सभी का सहारा लिया , लेकिन जब पंकज किसी भी तरह नहीं माना और उसने भूख हड़ताल शुरू कर दी तो आखिरकार प्रशासन को मजबूर होकर इस रिपोर्ट को रातानाडा पुलिस थाना भेजना पड़ा। जहां अब इस संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया है।

About The Author

Team KNLS Live

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks