
बरेली। स्मॉल एनिमल वेटरनरी एसोसिएशन, बरेली के तत्वावधान में विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिवस प्रतिवर्ष अप्रैल माह के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है। आज 25 अप्रैल को बरेली में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन होटल ओबरॉय हॉल में किया गया, जिसमें बरेली शहर एवं आसपास के जिलों के प्रतिष्ठित पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। साथ ही आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यापक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. डी.के. सक्सेना, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अजीत सक्सेना एवं डॉ. ए.के. सक्सेना उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आकाश गंगवार ने की, जबकि संचालन डायरेक्टर ऑफ प्रोग्राम डॉ. अभय तिवारी द्वारा किया गया।
इस वर्ष विश्व पशु चिकित्सा दिवस 2026 की थीम “पशु चिकित्सक: भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक (Veterinarians: Guardians of Food and Health)” रही, जिसके माध्यम से पशु स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा (Food Security) तथा जनस्वास्थ्य में पशु चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बरेली एवं आसपास के क्षेत्रों के पशु चिकित्सकों को एक मंच पर लाना, आपसी संवाद को बढ़ावा देना तथा पशुपालकों और पालतू पशु मालिकों को उनके पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं देखभाल के प्रति जागरूक करना रहा।
इस अवसर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा पालतू जानवरों में होने वाली सामान्य एवं गंभीर बीमारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल, हीट स्ट्रोक से बचाव एवं अन्य मौसमी समस्याओं पर भी चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त, कुत्तों में बाइट (bite) की समस्या, गर्मी के कारण व्यवहार में आने वाले बदलाव तथा उनसे बचाव के उपायों पर भी मार्गदर्शन दिया गया। पशु मालिकों को नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार एवं उचित देखभाल के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में बरेली के कई प्रमुख चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनमें डॉ. डी.के. सक्सेना, डॉ. ए.के. सक्सेना, डॉ. अभय तिवारी, डॉ. आकाश गंगवार, डॉ. जय वर्मा, डॉ. शिवाली शर्मा, डॉ. मोहम्मद आरिफ, मीडिया प्रभारी डॉ. अनिल गंगवार, डॉ. काजल गुप्ता, डॉ. सुमित त्रिपाठी, डॉ. सचिन यादव एवं डॉ. वर्षा गंगवार शामिल रहे।
यह कार्यक्रम न केवल पशु चिकित्सकों के बीच एकता एवं सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि समाज में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी की भावना को भी सुदृढ़ करेगा।