नीति बनी अनीति के बल पर आज की राजनीति

आज की बात

राज नीति का देश में और नागरिक का अपने यहाँ जो हाल है वो किसी से छिपा नहीं है। अपना काम बने दूसरा जाए भाड़ में। अपनी राम राम बनी रहे दूसरे की कल टूटे सो आज टूट जाए। अपनी नैतिकता खूटी पर टांग रखी है औरों की खंगालते फिर रहे हैं। एक समय था जब वोट मांगते समय केंद्र और राज्य के मुद्दे होते थे। बहुत ज्यादा हुआ तो मंहगाई गरीबी कॉमन मांगे होती थी। 75की विकास और परिवार नियोजन के साथ संजय गाँधी के पांच सूत्र ने घोषत् आपत्काल लगवा दिया। जिसके बाद और पहले का देश कितना बदला हुआ था। जिसके बारे में कहना अब कोई बताना ठीक नहीं रहेगा। क्योंकि अपनी कर तूत कोई पढ़ना तो दूर सुनना पसंद नहीं करेगा। अभी हम लोगों ने पिछले दस साल की सरकार आपातकाल की सी फुर्ती बाली नीति को एक परिवर्तन के साथ जिया है। बस फर्क था तो केवल माध्यम का। तब निर्गुट धर्म निरपेक्ष और अब तुष्टिकरण के बलात् शब्दों के साथ आरोप प्रत्या रोप बदली भाषा की लूटिनीति। नोट बंदी नश् बंदी से कम नहीं थी। विकास वही हुआ जो कांग्रेस का प्लान था। नीतियां वही लागू हुई जो कांग्रेस के ही विचार लिखित में थे। मगर इंद्रा के बाद जो कमी वापसी पर संजय की खटकी थी वैसे ही इस दोर में विपक्ष नेतृत्व विहीन दिखा। नैतिकता धर्म की स्थापना कर बिलक्षित भाव में घर कर गया।
राजीव के बाद आए राव ने तो और लुटियाकांग्रेस की डुबाई। जिसका परिणाम सोनिया के अंदर जो आत्म सुरक्षा की चिंता ने विपक्ष को और तहस नहस किया। वो टूट फुट अब तक जारी है। इस क्रम में इलाकै के दल और मजबूत हुए और जो अब तक कांग्रेस पर हावी हो चुके हैं। एक नही दर्जनों हारों ने ये हालत कर दी है पार्टी कांग्रेस के नेता गण तू तू मैं मैं के स्तर से नहीं उठ सके हैं।
उधर सत्ता नशी दल के तो हाल पूछो ही नहीं। वह तो रोम जल रहा है और राजा अपनी हांक रहा है। इतने बड़े लोकतंत्र का एकल हितैषी बना है। सबसे कमजोरी बाला तरीका चुप्पी वाला हथियार दूसरे गलती गिनाते हुए अपनी लापरवाही को छिपाने की कला में माहिर दल अब कि तब टूटने के कगार पर है।
आज ये सब इस लिए लिखना पड़ रहा है अब बात बात पर संविधान लोकतंत्र बदला कि टूटा की गिनती पल पल पर अदल बदल रही है।
इस समय जब राम मंदिर धारा 370 आदि आदि केबाद की
उत्कंठा के अनुरूप माहौल ओवर कंफिडेंस का हो चला है प्रधान अपनी हनक में और सपोर्टर तो चैन की नींद हो चार सो पार का नारा आरती की तरह दोहराते दिख रहा है। अभी सतर्क हो जायेंगे तो लाभ मिल सकेगा। नहीं तो शेखी खोरों की तरह फुटपाथ से भी उलीच दिया जायेगा।
शंकर देव

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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