राज कपूर को एक महीने पहले ही हो गया था मौत का एहसास

राज कपूर को एक महीने पहले ही हो गया था मौत का एहसास, ICU में जाने से पहले कहे थे ये तीन शब्दराज कपूर अस्थमा के मरीज थे। राज कपूर जब दादा साहब फाल्के अवार्ड लेने दिल्ली आये थे, वहीं उन्हें अस्थमा का अटैक पड़ गया और उनकी मृत्यु हो गई थी।

शोमैन के खिताब से नवाजे गए एक्टर और निर्देशक राज कपूर ने हिंदी सिनेमा को एक गोल्डन पीरियड दिया है।। राज कपूर को बचपन से एक्टिंग करने का शौक था। जैसे जैसे वो बड़े होते गए उनकी रूचि और बढ़ती गयी। 14 दिसंबर 1924 को जन्मे राज कपूर ने अपने फिल्मी करियर में 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 11 फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल किए। उन्होंने 71 फिल्मों में एक्टिंग की थी, 10 फिल्में डायरेक्ट की थी और 18 फिल्में प्रोड्यूस की थीं।

उन्होंने 6 फिल्मों में बतौर एडिटर काम किया था और राइटर के तौर पर फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में काम किया था। राज कपूर ने अपने करियर की शुरुआत 1945 में आई फिल्म ‘इंकलाब’ के साथ की, जब वो सिर्फ 10 साल के थे और एक्टर को आखिरी बार 1984 में ब्रिटिश टीवी शो ‘किम’ में कैमियो रोल में नजर आए थे।

1988 में वह फिल्म ‘हिना’ के डायरेक्शन में व्यस्त थे, लेकिन इसी दौरान अस्थमा की वजह से उनका निधन हो गया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्टर को अपनी मौत का एक महीने पहले ही एहसास हो गया था।

अस्थमा के आ रहे थे अटैक

राज कपूर 2 मई 1988 को दिल्ली में अपना दादा साहेब फाल्के सम्मान लेने के लिए आए थे। राज कपूर उन दिनों बीमार चल रहे थे। अस्थमा के मरीज थे और उन्हें बार-बार अस्थमा अटैक आ रहे थे और प्रोटोकॉल के कारण उनका ऑक्सीजन सिलेंडर भी बाहर ही रखवा दिया गया था। समारोह में सम्मान के लिए राज कपूर का नाम पुकारा गया, लेकिन राज कपूर उठ ना सके और उन्हें एक और अस्थमा का अटैक आया। जिसके बाद उन्हें ऑडिटोरियम से राष्ट्रपति की एम्बुलेंस में ही उन्हें AIIMS ले जाया गया। जहां उनसे मिलने कमल हासन पहुंचे थे।

मौत का हो गया था एहसास

राज कपूर की हालत बिगड़ती देख डॉक्टर ने उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। उस वक्त उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सरदाना भी मौजूद थे, जिन्हें राज कपूर ने रोक लिया। आईसीयू में जाने से पहले राज कपूर ने सरदाना से कहा था कि ‘अब मैं ठीक नहीं हो पाऊंगा। आई विल डाई…’। राज कपूर के ये आखिरी शब्द थे। थोड़ी देर बाद ही वह कॉमा में चले गए। ठीक एक महीने बाद 2 जून 1988 को उनका निधन हो गया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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