कोरोना वायरस: भोपाल के गैस पीड़ित गँवा रहे हैं जान

*कोरोना वायरस: भोपाल के गैस पीड़ित गँवा रहे हैं जान*
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों की संख्या 160 पर पहुंच गई है और पाँच लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो गई है. ख़ास बात यह है कि मरने वालें पाँचों लोग गैस पीड़ित थे.

भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 के दरमियानी रात को हुई गैस त्रासदी में हज़ारों लोगों की मौत हुई थी. इसके साथ ही हज़ारों ऐसे लोग थे जो ज़िंदगी भर के लिए कई तरह की बीमारियों से पीड़ित हो गए थे.

गैस त्रासदी से मिली बीमारियों से यह लोग किसी न किसी तरह संघर्ष कर रहे थे और अपनी ज़िंदगी चला रहे थे. लेकिन आख़िरकार इनमें से पाँच लोगों को कोरोना से हार माननी पड़ी.

इन्हीं में से 52 साल के एक व्यक्ति शहर के जहांगीराबाद इलाक़े में रहते थे. वो गैस पीड़ित थे और उनका इलाज लगातार चलता था. कुछ सालों पहले उन्हें टीबी भी हुआ था और उसका इलाज हो चुका था.

उनके बेटे ने बीबीसी को बताया, “9 अप्रैल को अचानक उनकी सांस तेज़ चलने लगी. उन्हें 10 तारीख़ को निजी अस्पताल लेकर गए जहां पर डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल जाने के लिए बोला. लेकिन हम गैस पीड़ित अस्पताल लेकर गए जहां पर उन्होंने उसे बंद कर दिया गया था. उसके बाद हम हमीदिया अस्पताल लेकर गए जहां हमें बताया गया कि दूसरे दिन आकर एक्सरे करवा लेना.”
उन्होंने आगे बताया, “11 तारीख़ को हम अस्पताल पहुंचे और उनका एक्सरे हुआ. उसके बाद उन्हें कोविड-19 सेक्शन में जाने के लिए बोला. लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.”
परिवार का कहना है कि गैस पीड़ित होते हुए भी उनका इलाज सही तरह से नही किया गया. दूसरे व्यक्ति कैंसर से पीड़ित थे लेकिन उन्हें कोरोना कैसे हुआ, इसका जवाब उनके घर वालों के पास भी नहीं है क्योंकि घर के सदस्य भी उन्हें कैंसर होने की वजह से दूर से बात करते थे.

मृतक के बड़े भाई ने बताया, “मेरे भाई को एक साल से कैंसर था और तीन बार उसकी कीमोथेरेपी हो चुकी थी. लेकिन चौथी बार में वह एक दम से कमज़ोर हो गया.”

उसके बाद उन्हें अस्पताल लेकर गए जहाँ गेट पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया. वे बताते है कि उन्हें ख़ुद नहीं मालूम कि उन्हें कैसे कोरोना हो गया.

अब पूरे परिवार को 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया है. लेकिन अब परिवार के लिए रोज़ी रोटी का संकट भी पैदा हो गया है.

इसके अलावा सबसे पहले 55 साल के एक व्यक्ति की मौत हुई थी. वो भी गैस पीड़ित थे और कोरोना से होने वाली पहली मौत भोपाल में उन्हीं की हुई थी. बताया जाता है कि उन्हें भी फेफड़े की समस्या थी.

उसके बाद 77 साल के एक रोगी की मौत हुई थी. वे भी गैस पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था.

वही 75 साल के पाँचवें मरीज़ पत्रकार थे और उनकी मौत अप्रैल 11 को हुई थी लेकिन उनकी रिपोर्ट 14 अप्रैल को आई जिससे पता चला की उन्हें भी कोरोना था. अब तक पाँच मौतें जो भोपाल में हुई है उनमें से तीन मौतें जहांगीराबाद इलाक़े में ही हुई है.
सीएमएचओ डॉक्टर प्रभाकर तिवारी ने पुष्टि की है कि पाँचों लोगों की मौत कोरोना से ही हुई है.

हालांकि भोपाल में जो स्थिति पैदा हो रही है उसके लिए गैस पीड़ितों के संगठनों ने पहले ही सरकार को आगह कर दिया था. लेकिन सरकार की प्राथमिकता में गैस पीड़ित थे ही नहीं.

गैस पीड़ितों के बीच काम करने वाली संस्था ‘भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन’ ने 21 मार्च को ही केंद्र और राज्य सरकार को बता दिया था कोरोना जैसी माहमारी में गैस पीड़ितों को ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

संस्था की सदस्या रचना ढींगरा ने बताया, “हमने सरकार को बता दिया था कि गैस पीड़ितों में कोरोना का ख़तरा ज़्यादा है. उनमें संक्रमण होने की आशंका अन्य लोगों की तुलना में पांच गुना अधिक है.”
वो आरोप लगाती हैं कि सरकार ने इसके बावजूद ज़रा भी ध्यान गैस पीड़ितों की ओर नहीं दिया बल्कि उन्होंने गैस पीड़ितों के इकलौते अस्पताल भोपाल मेमोरियल हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को पूरी तरह से गैस पीड़ितों के लिए बंद कर दिया.

अब गैस पीड़ितों के लिए कोई भी अस्पताल नही है जहाँ वे अपना इलाज करा सकें. गैस पीड़ितों के अस्पताल बीएमएचआरसी को सरकार ने कोविड-19 अस्पताल में तब्दील कर दिया है.

रचना ढींगरा ने बताया कि गैस पीड़ित अस्पताल के जितने भी विशेषज्ञ थे उन्हें कोविड-19 के अस्पताल में लगा दिया गया और गैस पीड़ितों को पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया गया.

हालांकि प्रशासन अभी तक भोपाल में हुई मौतों के पीछे के संबंधों को सामने नही ला रहा है लेकिन यह बात समझ आ रही है कि अधिकतर गैस पीड़ित किसी न किसी तरह की गंभीर बीमारी से जूझ रहे है इसलिए ज़रूरी है कि उन्हें कोरोना के संक्रमण से बचाया जाए.

प्रशासन ने इन मृतक लोगों के परिजनों को क्वारंटीन करके उनके क़रीब के सारे इलाक़ों को कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित कर दिया ताकि संक्रमण को बढ़ने से रोका जाए.साभार बीबीसी हिन्दी न्यूज से

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