मां के 5 बेटे लेकिन कोई रखने को तैयार नहीं, बुजुर्ग की शिकायत पर 3 बेटे गिरफ्तार

एमपी(राजगढ़) : मां के 5 बेटे लेकिन कोई रखने को तैयार नहीं, बुजुर्ग की शिकायत पर 3 बेटे गिरफ्तार

जिस मां के पांच बेटे हैं, वही अपनी वृद्धावस्था में दर-दर भटकने के लिए मजबूर हो गई है, कोई भी बेटा मां के बुढ़ापे में उसका सहारा बनने के लिए तैयार नहीं है, आखिर उस मां पर क्या बीत रही होगी, जिन्हें बचपन से लेकर युवा होने तक बड़े नाज से पाला, जिनकी हर ख्वाहिश पूरी की. शादी-ब्याह कर उनके घर बसाये. लेकिन आज वही औलाद अपनी बूढ़ी मां को दो टाईम की रोटी देने के लिए तैयार नहीं. पांच बेटे होने पर नाज़ करने वाली मां आज बेटों के खिलाफ पुलिस थाने की चौखट पर पहुंचकर दो रोटी की गुहार लगा रही है.

मध्य प्रदेश के राजगढ़ के देवाखेड़ी गांव की निवासी रामकुंवर बाई अपने पति लक्ष्मण सिंह की मौत के बाद से ही अकेली रह रहीं हैं, उनके पांच बेटे हैं लेकिन सभी शादी के बाद से ही अलग हो गए. वृद्ध मां को रखने के लिए कोई भी तैयार नहीं है.

लाचार मां ने ख़िलचीपुर थाने में पहुच कर पुलिस से गुहार लगाई है. इसके बाद पूरा मामला एसपी प्रदीप शर्मा के संज्ञान में आया और उन्होंने पुलिस के माध्यम से पांचों पुत्रों को समझाइश दी, लेकिन बूढ़ी मां का सहारा बनने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ.

पुलिस कप्तान ने पांचों पुत्रों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया, पुलिस कप्तान के आदेश के बाद ख़िलचीपुर पुलिस ने हिम्मत सिंह, राजेंद्र सिंह और धीरज सिंह वर्तमान में तीनों निवासी इन्दौर, शंकर सिंह हालमुकाम भवानीमंड़ी एवं रमेश सिंह निवासी सोयतकलां के विरुद्ध ‘वरिष्ठ नागरिक देखभाल अधिनियम की धारा 24’ के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दिया है. प्रकरण पंजीबद्ध करने के बाद ख़िलचीपुर पुलिस ने पीड़ित माँ को न रखने वाले तीन बेटों राजेंद्र सिंह, हिम्मत सिंह, रमेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं बाकी दो बेटों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा.

बुजुर्ग महिला रामकुमार बाई उम्र करीब 80 साल ने थाने में रिपोर्ट की थी कि उसके 5 लड़के हैं, उसे खाना पीना आश्रय नहीं दे रहे हैं. इस पर बुजुर्ग महिला के 5 लड़कों पर धारा 24 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था, बुजुर्ग महिला के पति शांत हो गए हैं, खाना पीना, आजीविका चलाने के लिए उसके पास कोई साधन नहीं है. इनके जो बच्चे हैं वे सभी बाहर रहते हैं. सभी उनको छोड़कर चले गए, ना तो कोई उन्हें आश्रय दे रहा. न कोई खर्चा दे रहे हैं, इस वजह से 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला परेशान हो रही है.

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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