
एटा
पंचायत विकास संस्थान उत्तर प्रदेश की कोषाध्यक्ष और कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन एटा की सदस्य सरिता कुमारी एडवोकेट ने कहा कि लोकतंत्र का प्रथम स्तंभ न्यायपालिका है और अधिवक्ता न्यायपालिका की आंख है, जो लोकतंत्र की रक्षा -सुरक्षा के लिए कार्य करता है, लेकिन जब अधिवक्ता ही खतरे में पड़ जाएगा और उसकी हत्याएं होने लगेगी, तो न्याय की आंख ही खतरे में पड़ जाएगी,तो न्याय होना संभव नहीं है। इसलिए देश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होना चाहिए।
उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि देश में पुरुष अधिवक्ताओं के साथ महिला अधिबक्ता भी अपने व्यवसाय के प्रति ईमानदारी से काम कर रही हैं और वर्तमान में बड़े ही तेजी के साथ न्यायपालिका में महिला जजों एवं वकीलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कुछ स्वार्थी न्याय के हत्यारे, गुंडे- मवाली लगातार अधिवक्ताओं को अपना निशाना बना रहे हैं, जो बहुत ही चिंतनीय एवं निंदनीय विषय है। ऐसी ही पूर्व में हुई घटना फिर चाहे वह उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पूर्व अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या हुई हो या महिला जज के साथ रेप और हत्या हुई होऔर देश, प्रदेश में अन्य अधिबक्ताओ की हत्याएं हुई हो या फिर हमारी तेज तर्रार अधिवक्ता बहन कासगंज की मोहिनी तोमर की नृसंग हत्या हुई है। यह सब घटनाएं किसी भी देश व किसी भी सरकार या न्यायपालिका, कार्यपालिका के लिए शर्मिंदगी की बात है जिसका मैं पुरजोर विरोध करती हूं। देश -प्रदेश में सरकार की गारंटी सुरक्षा- संरक्षण देना है लेकिन इसके बाबजूद भी अधिवक्ताओं की हत्यायें चिंतनीय विषय है। मुझे योगी सरकार पर पूरा भरोसा है एवं विश्वास है कि कासगंज में मोहिनी तोमर की हत्या का खुलासा जल्द से जल्द होगा और हत्यारे कोई भी हो, किसी भी सूरत में बचना नहीं चाहिए। न्यायपालिका की दो आंखें होती हैं जज और अधिवक्ता अगर इनमें कोई भी एक भी असुरक्षित है, तो न्याय होना संभव नहीं है। इसलिए न्याय की दोनों आंखों को एक दूसरे का सहयोग करते रहना चाहिए, तभी हम सब मिलकर सुरक्षित रहकर न्यायिक कार्य करते रहेंगे।इस घटना का आरोपी कोई भी हो, वह किसी का भी सगा नहीं हो सकता, इसलिए हमें सरकार और जातिवाद से ऊपर उठकर देश-प्रदेश हित में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए निर्भीकता पूर्वक काम करते रहना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि अधिवक्ता का व्यवसाय पूरी रिस्क भराव क्षेत्र है ऐसी स्थिति में,मैं सरकार से मांग करती हूं कि पूरे देश में उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम (एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट) लागू होना चाहिए।