श्रीमद भागवत कथा – द्वितीय दिवस
जीवन की गांठे खोलती है भागवत की कथा – वैष्णवी भारती

वाराणसी, 5 अक्टूबर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में नरिया, सुंदरपुर रोड स्थित रामनाथ चौधरी शोध संस्थान में चल रही साप्ताहिक श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति रिश्तों की अहमियत को समझाती है, वह रिश्तों को जोड़े रखने में विश्वास रखती है। आज जिस तरह से परिवार में विघटन हो रहा है, लिव इन रिलेशन का चलन बढ़ रहा है, रिश्ते ऑनलाइन निभाये जा रहे है यह सब पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता प्रभाव ही है और इसका खामियाजा भी हमारे समाज को ही भुगतना पड़ रहा है। यह समाज को खोखला कर रहा है। आज जीवन सामाजिक पारिवारिक नही बल्कि सोशल मीडिया तक सीमित रह गया है जिसमे संवेदनाएं और भावनाएं समाप्त होती जा रही ग्स सिर्फ दिखावे के रिश्ते रह गए है। सब मित्रता सोशल मीडिया पर ही रह गयी है, जबकि मित्र बनाना है तो ईश्वर को अपना मित्र बनाये।

उन्होंने कहा कि कुछ विकृत मानसिकता वाले राधा कृष्ण के रिश्ते का जिक्र करते हुए उसे लिव इन रिलेशन के नाम से जोड़ते है, बल्कि श्रीकृष्ण और राधा का रिश्ता अत्यंत पवित्र और चिरकाल तक अनुसरण करने वाला है। उन्होंने जब गोवर्धन लीला की तो उनकी आयु मात्र 7 वर्ष थी, जब वें वृंदावन छोड़ मथुरा गए तो उनकी आयु मात्र 11 वर्ष थी। उन्होंने कहा कि भागवत किसी अन्य युग की कथा नही अपितु इसी युग की, इसी समाज की कथा है जो नित्य प्रतिदिन हमारे समाज मे घटित हो रही है। भागवत वह कथा है जिसके माध्यम से जीवन की दिशा ठीक हो जाती है और जिसके जीवन की दिशा ठीक हो जाये तो उसके जीवन की दशा भी बदल जाती है।

काशी की महिमा का वर्णन करते हुए साध्वी वैष्णवी भारती जी ने कहा कि काशी साधारण नगरी नही है, यह विश्वनाथ की प्रिय अविनाशी नगरी है। काशी में भागवत श्रवण करने का अलग ही महत्व है, जब पितृ पक्ष में भागवत कथा श्रवण करने का अवसर मिल जाये तो समझो पितरों की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। भागवत की कथा जीवन की गांठे खोलती है और भवसागर पार लगाती है। ईश्वर प्रत्यक्षानुभूति का विषय है। दूसरे दिन कथा प्रसंग में गोकर्ण धुंधकारी उपाख्यान, वराहवतार कथा, हिरण्याक्ष वध प्रसंग आदि प्रसंगों का वर्णन किया।

व्यासपीठ के पूजन से हुआ कथा का शुभारंभ दूसरे दिन की कथा का शुभारंभ समाजसेवी शान्ति देवी रूंगटा द्वारा व्यासपीठ के पूजन से हुआ। आरती मुख्य यजमान महेश चौधरी, कृष्णा चौधरी, अरविंद भालोटिया, अनीता भालोटिया, मीना अग्रवाल, आलोक बोरा, गणपत धानुका, किरण धानुका, सुरेश तुलस्यान, पीयूष अग्रवाल, तारा शर्मा, सविता पोद्दार, रश्मि लखानी आदि ने उतारी। संचालन स्वामी अर्जुनानंद ने किया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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