
एटा ! सामाजिक संगठन साथी मिशन परिवार के जिला संयोजक साथी सुभाष ने मृत्यु भोज को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसको बंद करने का आह्वान किया है ! उन्होंने कहा है कि इस कुरीति ने न जानें कितने लोगों को कर्जदार बना दिया है, बीमार के परिजन को बीमारी के इलाज के कारण कर्ज लेना पड़ता है, मगर इलाज के बावजूद उनके व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु पश्चात भी इस सामाजिक कुरीति के कारण न चाहते हुए फिर से मृत्यु भोज के लिए कर्ज लेना पड़ता है, इसमें शामिल पड़ोसी, रिश्तेदार व समाज के लोग बड़े चाव से मृत्यु भोज खाते हैं और अपने अपने घर चले जाते हैं, मगर कर्ज में डूबा हुआ परिवार आने वाले समय में कर्ज मुक्त नही हो पाता है , जिसके कारण वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा तक नही दे पाता है, जिला संयोजक साथी सुभाष ने कहा है कि मेने खुद इस कुरीति का त्याग किया है और जो लोग इसका समर्थन करते हैं , हमारा संगठन उनके साथ हमेशा खड़ा रहेगा ! उन्होंने कहा कि जिस आंगन में पुत्र शोक से बिलख रही माता, वहां पहुंचकर स्वाद जीभ का तुमको कैसे भाता, पति के चिर वियोग में व्याकुल युवती विधवा रोटी, बड़े चाव से पंगत खाते तुम्हे पीड़ा नही होती, मरने वालों के प्रति अपना सद्व्यवहार निभाओ, धर्म यहीं कहता है बंधुओ मृत्यु भोज मत खाओ, चला गया संसार छोड़कर जिसका पालन हारा, पड़ा चेतना हीन जहां पर वज्रपात दे मारा, खुद भूंखे रहकर भी परिजन तेरहवीं खिलाते , अंधी परंपरा के पीछे जीते जी मर जाते, इस कुरीति के उन्मूलन का साहस कर दिखलाओ, धर्म यही कहता बंधुओ मृतक भोज मत खाओ !