
पेंशन वृद्धि भत्तों में कटौती को बताया सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना — निरुपमा शर्मा
बरेली। सरकार द्वारा वित्त अधिनियम 2025 के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता वृद्धि एवं संभावित 8वें वेतन आयोग के लाभों से वंचित किए जाने के फैसले के विरोध में पेंशनभोगियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
जीजीआईसी पेंशनर्स एसोसिएशन की महासचिव एवं एनिमल एक्टिविस्ट, पूर्व प्रधानाचार्य निरुपमा शर्मा ने इस निर्णय को न्यायसंगत न बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला वर्ष 1982 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय की भावना के विपरीत है, जिसमें सभी पेंशनभोगियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की बात कही गई थी, चाहे उनका सेवानिवृत्ति काल कोई भी रहा हो।
निरुपमा शर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में स्पष्ट उल्लेख है कि पेंशनभोगियों को उनके अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में दिया जाना चाहिए।

इसके बावजूद आज भी हजारों मामलों में विसंगतियां बनी हुई हैं और पेंशन, एरियर व वेतन वृद्धि से जुड़े अनेक प्रकरण सरकारी दफ्तरों में लंबित पड़े हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही की उदासीनता के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। “जिन कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपना जीवन सेवा में समर्पित किया, आज उन्हीं के साथ अन्याय किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि वित्त अधिनियम 2025 के प्रावधान पेंशनभोगियों के हितों पर सीधा प्रहार हैं और यह निर्णय दमनकारी व अन्यायपूर्ण है।
विधायिका बनाम कार्यपालिका पर सवाल
निरुपमा शर्मा ने सवाल उठाया कि जब सांसदों और विधायकों के वेतन व पेंशन में लगातार वृद्धि की जा रही है, तो कार्यपालिका के पेंशनभोगियों के साथ कटौती क्यों की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि वित्त अधिनियम 2025 में आवश्यक संशोधन कर पेंशनभोगियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।