गड्डे अच्छे होते है….. भविष्य का यही सबक है!
बहुत समय पहले टीवी पर एक साबुन का विज्ञापन आता था कि दाग़ अच्छे है… कुछ ऐसा ही आज इस लेख का तात्पर्य भी यही है।

जनपद एटा में जल जीवन मिशन के तहत सीवर लाइन का पिछले सात साल से लगातार कार्य प्रगति पर है।सीवर लाइन के कार्य के साथ-साथ इस जनपद की सबसे बड़ी जों समस्या है उस पर कभी किसी भी पार्टी नें ध्यान नहीं दिया है। जब कि वही सबसे बड़ी समस्या है और रहेंगी भी…। जनपद में एक ही मुख्य सड़क (GT रोड)होने की वज़ह से किसी भी बड़े आयोजन के साथ ही सरकार के बड़े कार्यों में तेजी इसी इकलौती सड़क की वज़ह से संपप्न नहीं हो पाता है। पूरा शहर पूरव से लेकर पच्क्षिम तक और दक्षिण से लेकर उत्तर तक का लिंक एक ही सड़क से होने की वज़ह से आवागमन के साथ ही सरकारी योजनाओं में देरी होती रही है।
जनपद की पहली योजना…
एटा जैसे पिछड़े शहर नें सीवर जैसी बड़ी योजना को कभी न देखा था और न ही रूबरू हुए थे। जब इस योजना के कार्यरूप को अमलीजामा पहनाया जा रहा था, समाजवादी सरकार थी… कागजो से सीवर निकली तो बीजेपी नें अपने कदम रख दिए थे। इस प्रोजेक्ट के उस समय के खर्चे की हिस्सेदारी सभी अधिकारी लें चुके थे और फिर लगातार सरकार के जननेताओं नें भी अपनी सीटों के हिसाब से लें लिया है! इतना सब होने के बाद भी प्रोजेक्ट को अंतिम पायदान तक लें जाने में कामयाब भी कंपनी हो रही है।
प्रयास जारी है……..
बरसात होने की वज़ह से पूरे जिले में भारी जलभराव हुआ है वही सीवर लाइन पड़ने वाले स्थानों पर मिट्टी धसने की वज़ह से गड्डे भी हो गए है। बेहतर है कि यह गड्डे हो चुके है क्योंकि अभी कंपनी के पास यह काम है और निरंतर सीवर का काम चल भी रहा है ऐसे में सीवर कंपनी पुनः हुए इन गड्डों को भरेगी ही।
एक बार काम ख़त्म होने के बाद कंपनी नें यह काम सरकार और प्रशासन को सौंप दिया तब अगर जनपद में बरसात होती है और सीवर लाइन के स्थानों पर गड्डे हो गए तो शहर की जनता को उन गड्डों को भरने के लिए बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
इसलिये बरसात में होने वाले सीवर लाइन के गड्डे होते रहें और सही से मिट्टी के बैठने के बाद जों निर्माण होगा. शहर के लिए बेहतर होगा…
सभी खेल में शामिल है….!
सीवर लाइन के खेल में वो सभी लोग शामिल है जिन्हे आपने वोट देकर चुना है (वो चाहें छोटा ही नेता क्यों न हो या फिर दिल्ली तक बैठते हो) तो ऐसे में आपके लिए वो कंपनी बेहतर है जों सात साल से सभी को कमीशन देने के बाद भी आपके शहर के लिए प्रोजेक्ट पर प्रयास कर रही है।
दौर याद कीजिये…
एक सरकार थी सपा…. उस सरकार के समय एटा के रोडवेज बस स्टेण्ड के सामने कितने बरसों तक पत्थर की ईटो से बने रोड पर हिचकोले खाकर समय बिताया है तो फिर एटा के लोग हार कैसे सकतें है और जब उस सरकार से आपने शिकायत नहीं की थी.तो इस सरकार से क्यों….
इसलिए गड्डे अच्छे है।हम बेहतर भविष्य की तरफ जा रहें है।कार्यरत कंपनी को समय दीजिये।
सोशल मिडिया का सहारा लेकर कुछ ऐसे भी लोग इस समय प्रशासन पर हावी हो रहें है। जों शिक्षित होने के बाद भी सबकुछ जानते हुए भी जनता को गुमराह कर रहें है।
सावधान रहें….