बिस्मिल के जन्मदिन पर विशेष आलेख
जानिए पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल ‘ के वंश वृक्ष की सही जानकारी जो गूगल पर भी गलत रूप से अंकित है

पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ब्राह्मण नहीं थे ,वे तोमर क्षत्रिय थे, उनको उनकी विद्वता और धर्म-कर्म में रुचि के कारण सब लोग उन्हें “पंडित “कहते थे।
बिस्मिल के परिवारीजन,मध्य प्रदेश के जिला मुरैना तहसील अंबाह के तोमर घार के ग्राम -बरबई में आज भी रहते हैं यह गांव चंबल के तट पर बसा है. बिस्मिल जी
के परदादा का नाम ठाकुर अमानसिंह तोमर था,यह दो भाई थे
ठाकुर अमान सिंह तोमर–समान सिंह तोमर
ठाकुर अमान सिंह तोमर के पुत्र हुए ठाकुर नारायण सिंह तोमर जो बिस्मिल जी के दादा थे, इनका विवाह विचित्र देवी से हुआ जो बिस्मिल जी की दादी थी जिनके पुत्र का नाम मुरलीधर सिंह था,. मुरलीधर सिंह का विवाह मूलमती से हुआ जो परिहार क्षत्रिय परिवार की बेटी थीं, इस तरह बिस्मिल जी की ननिहाल परिहार क्षत्रिय परिवार में है।
ठाकुर मुरलीधर सिंह के पिता ठाकुर नारायण सिंह तोमर गृह क्लेश के कारण अपना गांव बरबई छोड़कर शाहजहांपुर आ गए। यहीं रामप्रसाद का पालन-पोषण हुआ, शाहजहांपुर के ए. बी. रिच. स्कूल में उनकी शिक्षा दीक्षा हुई. बाद में वे आर्य समाज के संपर्क में आए, और वेदों के विद्वान हुए, ज्ञान व धर्म में पारंगत होने के कारण लोगो ने पंडित कहना प्रारम्भ कर दिया, जो उनके नाम के साथ अब तक जुड़ा हुआ है।
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की बहन शास्त्री देवी जादौन क्षत्रिय परिवार में कोसमा( मैनपुरी )में ब्याही हैं, बिस्मिल के भांजे हरिश्चंद्र सिंह अभी भी दिल्ली के उत्तम नगर में रहते हैं। कोई चाहे तो उनसे मिल सकता है।उनके गांव बरबई जा कर के भी उनके वंश की जानकारी प्रमाणित की जा सकती है।
वन्दे मातरम!जयहिंद!!