खरी – अखरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा बिना ओ बी सी आरक्षण पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराए मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार
इस आदेश से शिवराज सरकार के हाथ पांव फूल गए तो लगे कांग्रेस को कोसने. कांग्रेस भी कहां पीछे रहने वाली थी. दोनों ओ बी सी के शुभचिंतक बनकर एक दूसरे को लगे गरियाने.
शिवराज सरकार ने आनन-फानन सुप्रीमो कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की. परीणाम भी वही आया जिसकी उम्मीद थी. सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि ओ बी सी आरक्षण के साथ चुनाव कराए शिवराज सरकार.
एकबार फिर दोनों को एक दूसरे को कोसने का मौका मिला. अब दोनों खुद ही ओ बी सी को आरक्षण दिलाने के लिए अपनी – अपनी पीठ ठोंक रहे हैं.
मगर इन सबके बीच अगर किसी वर्ग की हालत श्वान से भी बदतर हुई है तो वह है सवर्ण समाज की. जिसको हमेशा मिला है बाबा का घन्टा. सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो सबने सवर्ण की छाती में मूंग जलते रहे हैं.
एकबार फिर पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव में स्वर्ण के हितों पर डाका डाला जाएगा और सवर्ण बंधुआ मजदूरों की माफिक कहीं भाजपा तो कहीं कांग्रेस के खूँटे से बँधा “हाँ जू – हाँ जू” कहता फिरेगा.
आरक्षण का अस्तर नासूर बनकर सवर्ण के दिलो-दिमाग पर डंक मार रहा है फिर भी लकवाग्रस्त होकर अपने हितों के हत्यारों की जयजयकार करने में लगा हुआ है. कब जागेगा सवर्ण समाज शायद तब जब कुछ नहीं बचेगा तब.