
बुंदेलखंड में मनोहर लाल पंथ, दलित राजनीति का बड़ा चेहरा वर्तमान में महरौनी विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक, उत्तर प्रदेश सरकार में श्रम व सेवायोजन मंत्री
!!.मजदूर से श्रम व सेवायोजन मंत्री मनोहर लाल: पैसे की कमी थी तो 10वीं में छोड़ी पढ़ाई, 2017 में महरौनी से 15 साल बाद खिलाया कमल, वर्ष 2022 में 1 लाख 84 हजार 778 वोट पाकर बनाया जीत का रिकार्ड.!!
बुंदेलखंड में मनोहर लाल पंथ, वो नेता जिसे दलित राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है। ये वो नेता हैं, जिन्होंने 22 साल में मजदूर से श्रम राज्यमंत्री तक का सफर तय कर लिया। योगी के मंत्रियों की सीरीज में आज कहानी उस मंत्री की जिसकी वजह से ललितपुर से 15 साल बाद भाजपा को जीत मिली।
पैसों की कमी थी तो 10वीं में छोड़नी पड़ी पढ़ाई
ललितपुर जिले में धौर्रा गांव, वर्ष 1969 में जन्म हुआ, 15 साल के मनोहर दसवीं में पढ़ते थे। उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। परिवार का पेट पालने के लिए पिता मूर्ति बनाने का काम करते थे। जैसे-तैसे खाने के पैसे जुट पाते थे। घर में पैसे की समस्या बढ़ने लगी। मनोहर को 10वीं में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
राजनीति में आने से पहले मजदूरी करते थे मनोहर
मनोहर लाल पंथ ललितपुर में पेट्रोल पंप संचालक भी है। पढ़ाई छोड़ने के बाद पैसे कमाने के लिए मनोहर अपने पिता को मूर्तियां बनाने में मदद करने लगे। इसके साथ साथ बाकी बचे वक्त में वो मजदूरी करके भी कुछ पैसे कमा लेते थे।
मनोहर का राजनीतिक सफर
20 साल पहले तक बुंदेलखंड की राजनीति में बुंदेला परिवार एक बड़ा नाम था। कहा जाता था कि ललितपुर समेत बुंदेलखंड के जनप्रतिनिधि भी इसी घराने से तय किया जाता था। मनोहर लाल इस घराने के संपर्क में आए और धीरे धीरे मनोहर की साख इस क्षेत्र में मजबूत होने लगी। यहीं से मनोहर की राजनीति में एंट्री हुई।
17 साल तक जिला पंचायत तक सीमित थी राजनीति
वर्ष 1995 में ललितपुर जिले की बांसी जिला पंचायत क्षेत्र से मनोहर पहली बार जिला पंचायत सदस्य बने। सीट का नाम था बांसी। शुरू से ही बीजेपी के साथ थे, जल्द ही अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष बना दिए गए। यहां से शुरू हुई राजनीति 17 साल तक जिला पंचायत के आसपास ही घूमती रही। वर्ष 2000 में द्वारा जिला पंचायत में हार गए। इसी चुनाव में अन्य सीट से खड़ी उनकी पत्नी कस्तूरी देवी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गईं। वर्ष 2005 के जिला पंचायत चुनाव में मनोहर और उनकी पत्नी दोनों हार गए।
विधानसभा चुनाव लड़े पर खत्म नहीं हुआ हार का सिलसिला
वर्ष 2012: बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन बसपा के फेरनलाल अहिरवार से महज 1700 वोटों से हार गए। दूसरी बार वर्ष 2017 में बीजेपी ने मनोहर को फिर से टिकट दिया। ललितपुर की महरौनी विधानसभा से चुनाव लड़े। इस बार 99 हजार 564 वोटों से जीत गए। ये एक ऐसी सीट है, जहां पिछले 15 साल से बीजेपी चुनाव नहीं जीती थी। मनोहर बीजेपी से पहली बार चुनाव जीते। सीधे राज्यमंत्री बना दिए गए। बस यहीं से मनोहर की सियासी पकड़ मजबूत होने लगी। मनोहर को योगी कैबिनेट में श्रम और सेवायोजन मंत्री बनाया गया। महरौनी विधानसभा में मनोहर ने 1 लाख 84 हजार 778 वोट पाकर द्वारा जीत का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने बसपा प्रत्याशी किरन रमेश खटीक को 1 लाख 10 हजार 451 वोटों के अंतर से हराया। यहां सपा प्रत्याशी रामविलास रजक 58 हजार 381 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। वर्तमान में महरौनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनोहर लाल पंथ श्रम और सेवायोजन मंत्री है।