जनपद में लगातार मिल रहे शवों से लोग चिंतित तथा भयभीत।
जिले में कानून व्यवस्था दिख रही है लचर।
स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जनपद में बढ़ रहे मौत के आंकड़े, प्राइवेट चिकित्सक काट रहे चांदी।

जनपद एटा: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और सत्ता में एक बार फिर यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ जा चुके हैं। वहीं जिस प्रकार पिछले पांच साल के कार्यकाल में भयमुक्त माहौल रहा उसको देखते हुए जनता ने सरकार को एक बार फिर इसलिए सत्ता पर काबिज किया क्योंकि वह चाहते हैं गुंडागर्दी, चोरी, लूट, हत्या जैसे अपराधों से प्रदेश की जनता भयमुक्त रहे, परंतु जनपद एटा में पिछले कुछ समय से लगातार बड़ी बड़ी घटनाओं का प्रकाश में आना जनपद के लोगों को भय का एहसास करा रहा है।
आपको बता दें हाल ही में जनपद के अंदर आधा दर्जन से अधिक शव मिलने से लोग सहमे हुए हैं, लगातार एक के बाद एक मिल रहे शव से लोगों में भय पैदा कर रहे हैं। वहीं कानून व्यवस्था भी लचर नजर आ रही है। अगर बात की जाए तो जिला प्रशासन भी कछुए की चाल पर अग्रसर नजर आ रहा है, जनपद में कुकुरमुत्ता की तरह तेजी से उपज रहे झोलाछाप डॉक्टरों की फसलें आम लोगों और गरीबों की जान से खिलवाड़ करने में कोई भी कोताही नहीं बरत रही हैं। प्राइवेट चिकित्सालय चांदी काट रहे हैं। वही गरीब से उपचार के नाम पर मोटी मोटी रकम ऐंठी जा रही है और बदले में उन्हें केवल मौत नसीब हो रही है।
आपको बता दें जनपद में प्राइवेट चिकित्सक जो पूर्णतया झोलाछाप हैं वह बड़े बड़े ऑपरेशन को मोटी रकम लेकर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने में व्यस्त हैं। आपको बता दें जनपद में निजी चिकित्सालयों पर मौत के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से हर बार प्रतिबंध लगाने के बाद प्रसाद लेकर फिर बरी किया जा रहा है।
हाल ही में एक प्राइवेट चिकित्सालय पर जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने प्राइवेट चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उसे मौत का जिम्मेदार बताया, जिसके बाद हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग टीम ने जांच कर निजी चिकित्सालय को हरी झंडी दे दी। अब बात आती है कि गरीब सरकारी अस्पताल होने के बावजूद भी प्राइवेट चिकित्सकों के यहां जाता ही क्यों है..? तो आपको बता दूं कई बार ऐसा हुआ है कि मेरे मिलने वाले लोगों का फोन मेरे पास भी आया है उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में उनकी प्रसूता (पत्नी) कई घंटों से तड़प रही है लेकिन उपचार नहीं मिल रहा है। डॉक्टर लगातार उसे गुमराह कर रहे हैं ऐसे में वह अपने मरीज को तड़पता ना देख प्राइवेट चिकित्सालय पर जाने को मजबूर हो जाते हैं। जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे हैं मोटी तनख्वाह में सरकारी चिकित्सक मौज लेते नजर आते हैं। जब सरकारी सिस्टम ही खराब हो तो लोग मजबूर होकर इधर-उधर भटकने को विवश नजर आते हैं।
जबकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है वहां सरकारी अस्पताल में बहुत अच्छी सुविधाएं हैं गरीब की तत्काल सुनी जाती है जबकि उत्तर प्रदेश के जनपद एटा के अस्पतालों का हाल बेहाल है। मेडिकल कॉलेज के नाम पर खानापूर्ति की गई है। वहीं जैसे पहले चल रहा था सब कुछ वैसा ही अभी भी चल रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी चांदी काट रहे हैं गरीब मजदूर इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे हैं।