फर्जी दस्तावेजों से नौकरी कर रहे शिक्षक की सेवा समाप्त – रिपोर्ट शुभम शर्मा

फर्जी दस्तावेजों से नौकरी कर रहे शिक्षक की सेवा समाप्त – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल में फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों से शिक्षक बनकर नौकरी करने का प्रकरण पकड़ा गया है। फर्जी शिक्षक पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के आदेश खंड शिक्षाधिकारी को दिए गए हैं। वित्त एवं लेखा विभाग को रिकवरी करने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है। बीएसए सतेंद्र कुमार ढाका ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय बिजौली के प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार पर फर्जी दस्तावेजों से नौकरी करने पर कार्रवाई की गई है। वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि दोषी शिक्षक को नौकरी के पहले दिन से लेकर अब तक दी गई सैलरी का आकलन किया जाए, जिससे रिकवरी की कार्रवाई की जा सके। बिजौली के खंड शिक्षाधिकारी को शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। दोषी शिक्षक तहसील कोल के गांव खेड़ा नारायन सिंह का रहने वाला है। उसके खिलाफ गांव के ही सुनील कुमार ने शिकायत की थी कि प्रदीप ने शास्त्री की फर्जी अंकतालिका लगाकर नौकरी हासिल की है। 2020 में हुई शिकायत पर जांच कराई गई, जिसमें शास्त्री की डिग्री फर्जी पाई गई। यह डिग्री संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी की थी। प्रदीप से जवाब मांगा गया तो दो नोटिस के बाद उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से बीए किया है। इसकी जांच कराई गई तो वो डिग्री उनकी नहीं पाई गई। यह भी कूटरचित निकली।अंकतालिका की भी जांच कराई गई तो वो प्रदीप कुमार पाराशर के नाम पर मिली। प्रदीप कुमार को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने का दोषी पाया गया। बीएसए ने बताया कि प्रदीप कुमार ने मृतकाश्रित कोटे में 2001 में नौकरी पाई थी। उनकी सेवा समाप्त कर शून्य कर दी गई है। वित्त विभाग की ओर से अब तक जारी सैलरी की रिकवरी भी प्रदीप कुमार से की जाएगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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