ई-बसों पर खर्च पांच हजार, कमाई सिर्फ 12 हजार – रिपोर्ट शुभम शर्मा

ई-बसों पर खर्च पांच हजार, कमाई सिर्फ 12 हजार – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – शहर में दो रूटों पर चल रहीं ई-बसें कमाई के मामले में पिछड़ रही हैं। पांच ई-बसों के संचालन से प्रतिदिन औसतन 12 हजार रुपये की कमाई हो रही है,जबकि इन बसों को चार्ज करने में पांच हजार रुपये से अधिक का खर्च आता है। इसके अलावा, चालकों-परिचालकों का वेतन व अन्य खर्च अलग हैं।सूबे के मुख्यमंत्री ने चार जनवरी को ई-बसों को हरी झंडी दिखाई थी। शहर के दो रूटों पर चल रहीं पांच ई-बसों में तकरीबन एक हजार यात्री रोजाना सफर कर रहे हैं। बसों का समय तय न होने से यात्रियों को थोड़ी परेशानी हो रही है। पहला रूट महरावल से सारसौल चौराहा, बस स्टैंड होते हुए हरदुआगंज तक 20 किलोमीटर का है। महरावल से हरदुआगंज का किराया 30 रुपये है। दूसरा रूट बौनेर से खेरेश्वर चौराहे तक पंद्रह किलोमीटर का है और किराया बीस रुपये है। एक बस प्रतिदिन दस चक्कर लगाती है। अधिकारियों के अनुसार, महरावल से हरदुआगंज तक 28 सीटर ई-बस पूरी भरी होने पर करीब नौ सौ रुपये किराया आना चाहिए। इस हिसाब एक बस से प्रतिदिन करीब नौ-दस हजार रुपये आय होनी चाहिए।रोडवेज के आरएम मो परवेज खान ने बताया कि पांच बसों द्वारा दोनों रूटों पर एक दिन में 50 चक्कर लगाए जा रहे हैं। इससे करीब 12 हजार की कमाई हो रही है। अभी यह कमाई औसत से कम है। इसी माह में रूटों का विस्तार होने के साथ-साथ कमाई भी बढ़ेगी।एक ई बस को फुल चार्ज होने में औसतन 133 यूनिट बिजली खर्च होती है। फुल चार्ज के बाद यह बस 200 किमी. चलती है। हालांकि गर्मियों में एसी चलने के कारण यह औसत कम हो सकता है। करीब 1050 रुपये की बिजली एक ई-बस के चार्ज होने पर खर्च होती है। पांच बसों पर पांच हजार से अधिक का खर्चा आता है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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