सलाखों से निकली साहित्य की रोशनी

सलाखों से निकली साहित्य की रोशनी

निबंध संग्रह उजालों की ओर तैयार।
राज भवन मुंबई में हुआ कार्यक्रम।
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया विमोचन कासगंज कारागार के बंदियों ने लिखे हैं निबंध।
पद्मश्री के लिए नामांकित हो चुके हैं रघुनंदन।

कासगंज 20 दिसंबर आजादी से पूर्व कारागार की पहचान यातना ग्रहों के रूप में होती थी जहां क्रांतिकारियों को आजादी की लड़ाई से विमुख रखने के लिए निरुद्ध करके उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता था ताकि उनके हौसलों को परास्त किया जा सके। मगर अब जेलों का स्वरूप बदल चुका है और जेल यातना केंद्रों के रूप में नहीं बल्कि रिफॉर्मेटिंग सेंटर के रूप में पहचानी जाने लगी है। जेल सुधारों के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से सफलतापूर्वक कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता, जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन के प्रयास रंग लाए हैं और जनपद कारागार कासगंज के बंदियों ने अपनी साहित्यिक अभिरुचि को निबंध संग्रह के रूप में प्रदर्शित किया है। निबंध संग्रह उजालों की ओर में जनपद कारागार कासगंज के दर्जन भर से अधिक बंदियों ने पर्यावरण संरक्षण ,बेटी बचाओ, कन्या भूण हत्या, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण एवं राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर अपनी लेखनी चलाई है जो उनकी रचनात्मकता का प्रमाण है। आज राजभवन मुंबई में जब महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कासगंज कारागार के बंदियों द्वारा लिखित निबंध संग्रह उजालों की ओर का विमोचन किया तो यह कार्यक्रम जेलो में आ रहे रचनात्मक बदलाव का साक्षी बना और यह संदेश प्रसारित हुआ कारागार अब सुधार ग्रह की भूमिका को निभाने में सक्षम होने लगे हैं।
निबंध संग्रह उजालों की ओर के विमोचन के बाद महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने विचारों में कहा कि कारागार की भूमिका अब पूरी तरह बदल चुकी है l देश के विभिन्न राज्यों में तरह-तरह के रचनात्मक कार्यक्रम बंदियों के कल्याण के लिए लागू किए जा रहे हैं जिससे जेल में रहते हुए बंदी शिक्षा , तकनीकी ज्ञान हासिल करके अपने जीवन को रचनात्मक दिशा की ओर प्रेरित करने में सफल हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लेखन से मानसिक परिवर्तन होता है और व्यक्ति अच्छे एवं बुरे में फर्क करने की समझ अपने अंदर विकसित कर पाता है l इससे न सिर्फ बंदियों की निराशा दूर होती है बल्कि वह एक बेहतर कल के लिए अपने आपको तैयार कर लेते। राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश की जेलों में रचनात्मक लेखन अभियान संचालित करने के लिए डॉ प्रदीप रघुनंदन के प्रयासों की प्रशंसा की।
जेल सुधारक. पद्मश्री के लिए नामांकित हो चुके डॉ.प्रदीप रघुनंदन ने कहा कि कारागार आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपराधी नहीं होताl कभी-कभी परिस्थितियां या फिर क्षणिक आक्रोश व्यक्ति को कारागार में ले आता है l ऐसे में कारागार में निरुद्ध रहते हुए बंदियों की मानसिक स्थिति स्वस्थ और सामान्य बनी रहे और वह जेल में रहते हुए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जुड़कर अपने जीवन में एक नई शुरुआत कर सकें यही हमारा प्रयास है। उन्होंने बताया कि रचनात्मक लेखन अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के कारागार के हजारों बंदियों की कविता कहानी गीत गजल निबंध आदि विभिन्न साहित्यिक विधाओं में सैकड़ों पुस्तकें प्रकाशित कराई जा चुकी है।
बाल कल्याण समिति न्याय पीठ जनपद कासगंज के अध्यक्ष प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन के प्रयास अपने आप में विशिष्ट है जो कारागार में निरुद्ध बंदियों के जीवन में नया बदलाव लाने की दिशा में सार्थक और सकारात्मक पहल है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति में परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम है l कारागार में निरुद्ध बंदी जब लेखन कार्य से जुड़ेंगे तो निश्चित रूप से वह पड़ेंगे भी और ऐसी स्थिति में वह अपने अंदर एक बदलाव लाने का संकल्प जरूर लेंगे।
इस अवसर पर राज्यपाल के एडीसी कमल घंडियाल, राजभवन के छायाकार पराग कुलकर्णी, राजभवन सहायक निलेश कुमार संजीव शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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