प्रधानमंत्री मोदी जी !
क्या?अब आप लोग देश के आम आदमी की जान लोगे

दोस्तो! सही बात का समर्थन जरूरी है चाहे आप जिस किसी भी पार्टी के समर्थक हों आजादी के बाद से पिछले 2 से 4 साल पहले तक आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में सालाना 5-10% ही वृद्धि होती थी। लेकिन पिछले 2 सालों से जब से भाजपा सरकार दोबारा मोदी जी प्रधानमंत्री बने है तब से आज तक आवश्यक वस्तुओं में 50-300% तक की वृद्धि कर दी गई है इस बेहिसाब महंगाई से गरीब और मध्यम वर्ग असहाय और बदहाल हो गया है
मोदी जी के ‘प्रधानमंत्री’ बनने के बाद सिर्फ पेट्रोल,डीजल,गेस का सिलेंडर,सरसों का तेल और रिफाइंड ऑयल
ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ महँगा हुआ है,सीमेंट,रेत,बजरी,सरिया,स्टील,मिट्टी का तेल,मोटरसाईकिल, ट्रैक्टर, खाद,यूरिया,DAP,बीज,कृषि के उपकरण,दवाएं,इलाज,मेडिक्लेम,डिश रिचार्ज,
मोबाइल,इंवर्टर,रेलवेटिकिट,बस किराया और भी ‘सैकड़ों ऐंसी चीजें हैं जो 2013 के मुकाबले बहुत ही ज्यादा महँगी हुईहैं,गरीब,मजदूर, किसान और मध्यम वर्गीय लोगों की जरूरत की अधिकतर चीजें बेहद ही महँगी हो गयी है थोक महंगाई बढ़ने के पीछे कारण गैर-खाद्य वस्तुओं,कच्चे तेल,पेट्रोल व डीजल,प्राकृतिक गैस,धातुओं,उत्पादों,खाद्य उत्पादों, कपड़े, रसायनों और रासायनिक उत्पादों के दाम बढ़ना बताया गया है।यानी सब कुछ महंगा हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि महामारी की वजह से पिछले डेढ़ साल में बिजली,कोयला, पेट्रोलियम व गैस,सीमेंट जैसे अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों तक में उत्पादन पर भारी असर पड़ा बड़े कारखानों से लेकर छोटे उद्योगों तक की हालत खराब हो गई।मांग-आपूर्ति चक्र टूट गया आबादी के बड़े हिस्से के पास पैसे और रोजगार का संकट खड़ा हो गया। अब जब की पिछले कुछ महीनों से सब कुछ पटरी पर आने का दावा किया जा रहा है तो महंगाई पीछा नहीं छोड़ रही।
महंगाई की मार से आम आदमी परेशानहै आमदनी के हिसाब से भी आम आदमी को महीने के आखिर मैं उधार लेना पढता है।ज़रूरत की चीज़ों ही वो हिसाब से लेता हूँ और सोचता है की कुछ बच जाए लेकिन हर बार महंगाई की मार ऐसे पड़ती है की बस ज़रूरत की चीज़े अ जाये बड़ा ही अशचर्या होता है ,
जब मैं कुछ साल पहले की बातें सोचता हूँ आज के दौर में और तब में ज़मीन आसमान का फ़र्क है बड़ी ही समझदारी और गोर करनी वाली बात है की तेल कंपनी सरकार से पेट्रोल और diesal की कीमतें बढ़ने को कहती है और सरकार बढाती तो सिर्फ एक रूपया है पर आम आदमी को सॊ रुपये से ज्यादा का भार पढता है क्यूँकी उस एक रुपये के चलते सभी चीज़ो के दाम बढ़ जाते हैं आम आदमी के पास और कोई चारा भी नहीं होता सिवाए खरीदने के और महेंगे चीज़ छोडने के वो अपने रोज़ के खान -पान से उन चीजों को निकलने पर मजबूर है
ये महँगाई आम आदमी की जेब ही नहीं कमर भी तोड़ रही है क्यूंकि खर्च आमदनी से ज्यादा है जिससे सब कुछ महंगा हो रहा है हर एक चीज सुई से लेकर सब कुछ ऐसे में आम आदमी का हाल बेहाल है बदलते मौसम ,युग,और दिन की तरह ये भी रोज़ बदलती है पर घटने का नाम नहीं लेती आशा है सरकार से की आने वाले दिनों मैं ये कुछ कम और सरकार इन विषयों पर आने वाले दिनों में बजट सत्र में धयान दे वरना इसके बढ़ते चलते आम आदमी का जीना मुश्किल हो जायेगा
पेट्रोल और डीजल के दाम तकरीबन रोज नया रिकॉर्ड बना रहे हैं, जिसके चलते आम आदमी महंगाई से त्रस्त है. ईंधन के दामों में तेजी से आम उपभोग की चीजें जैसे सब्जियां आदि भी महंगी हो गई हैं. हाल में एलपीजी सिलेंडर रसोई गैस (PNG) के दामों में वृद्धि से महंगाई की दोहरी मार पड़ी है. सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए हैं
ईंधन के दाम में तेजी का आलम ये है कि डेढ़ साल से कम समय में पेट्रोल 36 रुपये लीटर तो डीजल करीब 27रुपये महंगा हुआ है उज्जवला के सिलेंडर कबाड़ में बिकने लगे हैं, योजना के लाभार्थी वापस गोबर के कंडे और लकड़ी जलाकर चूल्हा सुलगा रहे हैं. करें भी तो क्या. सिलेंडर के दाम 925 से 1050 रुपये के आसपास हैं, जो इनकी पहुंच से दूर हैं. लाभार्थी कह रहे हैं कि सिलेंडर भरवा नहीं पा रहे हैं, 4-4 बच्चे हैं, मजदूरी करते हैं, कहां से भरवाएं सिलेंडर. वहीं सिलेंडर सप्लाई करने वाले ड्राइवर बताते हैं कि सिलेंडर इतना महंगा हो गया, उस चक्कर में ग्राहक लेने नहीं आ पाते हैं, क्योंकि पैसे की व्यवस्था ही नहीं हो पाती.
थोक महंगाई में बढ़ोतरी को भी मामूली मान कर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कुछ दशमलव महंगाई का बढ़ना भी आम आदमी की जेब पर भारी असर डाल देता है। महंगाई चाहे थोक हो या खुदरा, है तो महंगाई ही और पैसा आम आदमी की जेब से ही निकलता है।मोदी सरकार गरीबों के भावनाओ के साथ खिलवाड़ कर रही है भाजपा ने वादा किया था कि महंगाई कम करेगी लेकिन आज इतनी महंगाई कर दी है कि आम जनता का भरण भी सही से नही हो पा रहा है लगातार बढ़ रही महंगाई की एक वजह कालाबाजारी और मुनाफाखोरी भी है ऐसे में हम सभी को एकजुट होकर मूल्य वृद्धि के फैसले वापस लेने के लिए सरकार पर दवाब बनाना चाहिए।