शिक्षक दिवस : 5 सितंबर 5/5
शिक्षक दिवस का श्रेय किसको और क्यों?-
राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन दोनों के एजुकेशन के लिए किए गए कार्यों को पढ़कर बताए कि किसका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहिए?
1.ज्योतिबा ने 1848 से ही शिक्षा क्रांति का आगाज कर दिया था अर्थात राधाकृष्ण के जन्म (1888) से 40 साल पहले।
राधाकृष्णन एक कलेक्टर के घर पैदा हुए, स्कॉलरशिप के जरिये पढ़ते रहे, बाद में अंग्रेजों के अधीन कॉलेजों व यूनिवर्सिटी में अध्यापन का काम करते रहे और इस सेवा के बदले उनको 1931 में “सर” या “नाईटहुड” की उपाधि भी दी गई। अंग्रेजों से आजादी के लिए भारतीय लोगो की कुबार्नी भरे संघर्ष से उन्होंने हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखी।
2.ज्योतिबा ने 1848 से लेकर 1852 तक 4 साल के अंदर ही करीब 20 स्कूल खोल डालें जबकि राधाकृष्णन ने कभी स्कूल नहीं खोला।
3.ज्योतिबा ने पिछड़ी जाति के लोगों को बिना पैसे लिए एजुकेशन दिया जबकि राधाकृष्णन ने जिंदगी भर पैसे के लालच में लोगों को पढ़ाया।
4.ज्योतिबा ने खुद का धन खर्च कर लोगों को शिक्षा दी जबकि राधाकृष्णन ने एजुकेशन देने के नाम पर खूब धन कमाया।
5.ज्योतिबा ने गांव-देहातों में 20 स्कूल खोले जबकि राधाकृष्णन का गांव-देहातों से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं था, स्कूल खोलना तो दूर की बात है।
6.ज्योतिबा ने सबको वैज्ञानिक सोच वाली एजुकेशन दिया जबकि राधाकृष्णन वैदिक/वर्ण/ब्राह्मण/जाति/हिंदू धर्म की गैरबराबरी और अंधविश्वास वाली एजुकेशन का कट्टर समर्थक था।
7.ज्योतिबा ने बालविवाह आदि कुरीतियों का विरोध किया जबकि राधाकृष्णन बाल विवाह का समर्थक था और अपनी लड़की का बाल विवाह किया।
8.ज्योतिबा ने महिलाओं के लिए पहला स्कूल 1848 में खोला जबकि राधाकृष्णन महिला शिक्षा का विरोधी था।
9.ज्योतिबा ने अपनी संगिनी को सबसे पहले एजुकेशन दी, भारत की प्रथम प्रशिक्षित शिक्षिका बनाया जबकि राधाकृष्णन ने अपनी संगिनी को अनपढ़ बनाए रखा।
10.ज्योतिबा ने अपना गुरु छत्रपति शिवाजी महाराज को माना जबकि राधाकृष्णन ने सावरकर को।
11.ज्योतिबा ने गुलामगिरी नामक ग्रंथ लिख पिछड़ी (SC ST OBC MC) जातियों को गुलामी का अहसास कराया जबकि राधाकृष्णन ने वैदिक/वर्ण/जाति/हिंदू धर्म का समर्थन ही किया।
