: राष्ट्रपति भाषण
आज यहां उपाधियां और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई और साधुवाद

यह एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां मैं किसी समारोह में दूसरी बार आया है,यहां बाबा साहेब के विचारों का समावेश होता है,यहां उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अलग से पुरस्कृत किया जाता है..
यहां समतामूलक संस्कारो को दिया जाता है….!
उत्तर प्रदेश की अपनी पिछली यात्रा के दौरान मुझे बाबा साहेब अम्बेडकर के सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास करने का अवसर मिला था, बाबा साहेब एक शिक्षाविद समाजसुधारक, विधिवेत्ता तो थे ही साथ ही वो एक विशेषज्ञ थे…
: बाबा साहेब के पुस्तको में आपको कई उल्लेख मिलेंगे जिसकी मदद से आप अपना निर्माण कर ने में सहायक होंगे
उन्होंने कहा था,शील के बिना शिक्षा अधूरी है,शील के बिना शिक्षा ज्ञान कि तलवार अधूरी है….!!
आप सबके विश्विद्यालय के मूल तत्व में शब्द दिए गए प्रज्ञा शील और करुणा…बाबा साहेब ने इसे प्रतिपादित किया है…
बाबा साहेब ने बुद्ध संत कबीर ज्योतिबाफुले को अपना ईश्वर माना
[हाल ही में सम्पन्न ओलम्पिक मे हमारी बेटियों ने मान बढ़ाया है,समान अवसर मिलने पर वो उन्नत दिशा में बढ़ती हैं,
आज भी इस समारोह में बेटियों को सम्मानित किया गया, उनकी संख्या अधिक थी,बाबा साहेब का यही सपना था…उन्होंने महिलाओं के लिए कई कार्य किये उस दौर में महिला अधिकार के लिए ये सोचना भी एक गुनाह होता था,लेकिन उन्होंने इसे किया