राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाने वाले जनप्रतिनिधियों को घबराने की जरूरत नहीं

!!.धनबल बाहुबल मध्य प्रदेश का जन नेतृत्व, एक दिन के विधायक भी बने तो 84240 रुपए पेंशन पक्की: 146 पूर्व विधायक, 79 पारिवारिक पेंशन पाने वाले परिवार.!!
राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाने वाले जनप्रतिनिधियों को घबराने की जरूरत नहीं

जन नेतृत्व विधायक बनो गंगा नहाओ, देश की संसदीय पद्धति में एक बात की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है की विधायक रहने वाले व्यक्ति को जीवन पर्यंत जीवन यापन के लिए अच्छी खासी पेंशन मिलेगी l हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में पूर्व विधायक के लिए बेसिक पेंशन ₹36 हजार तय है l नई संशोधित पेंशन दरों का वर्ष 2016 में प्रावधान किया था l पूर्व विधायक के निधन के बाद उसकी धर्म पत्नी के नाम से भुगतान होती है l पूर्व विधायक और उसकी पत्नी दोनों का निधन होने की स्थिति में उसके नाबालिग बच्चों को पेंशन देने का प्रावधान है l लड़की का विवाह होने के बाद आधी पेंशन मिलेगी लेकिन पुत्र को बालिक होने तक की पेंशन मिलेगी l
यदि कोई 1 दिन के लिए विधायक रहता है तो वह आज की तारीख में 84, 240 रुपयों मासिक पेंशन का हकदार होगा l हालांकि मध्य प्रदेश में ऐसा कोई भी विधायक नहीं है, जो केवल एक दिन के लिए विधायक रहा हो l इसलिए राजनीति को सेवा का माध्यम बनाने वाले ने नेताओं को घबराने की जरूरत नहीं है l उनके सुरक्षित भविष्य का पूरा ध्यान रखा गया है l हां ऐसे विधायकों की संख्या बहुत है जो 5 साल का एक टेंप जीत कर आए थे l यदि उम्र के हिसाब से देखा जाए तो पंडित सुखराम सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक हैं, जो कि पहली बार मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्षा 1962 में चुनकर आए, विधानसभा सदस्य रहने के अलावा केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे l उनके साथ साथ ईश्वरदास ने विधानसभा में लंबी पाली खेली है l विधानसभा सचिवालय पूर्व विधायकों के सेवा काल की गणना पहली बार जीत कर आने की अवधि से 5 साल को एक टर्न गिनते हैं l उसके अलावा जितने वर्ष विधानसभा में सदस्य रहते हैं, उसे वर्षों के तौर पर गिना जाता है l

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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