-वर्ष 2020-21 में हुई 8383 गर्भवती की जांच
-कोविड के दौरान भी मनाया गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस

एटा
गर्भवती की व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान योजना चलाई जा रही है । कोरोना काल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की महत्ता को देखते हुए जनपद में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी कोविड-19 के अनुरूप व्यवहारों का पालन करते हुए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वह कोरोना के चलते जनपद में अन्य स्वास्थ्य गतिविधियों की चाल को धीमा नहीं होने दे सकते । प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान योजना शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। योजना का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक द्वितीय व तृतीय तिमाही वाली गर्भवती की एमबीबीएस चिकित्सक अथवा स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में जांच करके उन्हें समुचित इलाज व जानकारी मुहैया कराना है। इससे शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को रोका जा सकता है । 9 मई को रविवार का अवकाश होने के कारण सोमवार (10 मई) को जनपद में सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया गया। जनपद में जिला महिला अस्पताल समेत 11 ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया गया।इस दौरान कुल 171 गर्भवती की जांच की गई जिसमें से 14 उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं को चिन्हित किया गया ।
सीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर गर्भवती के ब्लड ग्रुप, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, वजन, यूरिन, एचआईवी ,सिफलिस आदि की जांच तथा अल्ट्रासाउंड के साथ अन्य जांच निशुल्क हुई । हाई रिस्क वाली गर्भवती को आयरन सूक्रोज इंजेक्शन लगाकर आयरन फोलिक एसिड व कैल्शियम की गोली देकर उनका नियमित सेवन करने की सलाह स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी गई। इस दौरान कोविड-19 के अनुरूप व्यवहारों का भी पालन किया गया।
जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता ताहिरा अल्वी ने बताया कि कोरोना काल में उचित पोषण गर्भवती की इम्यूनिटी के लिए बहुत आवश्यक है। बेहतर पोषण गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होने से बचाता है ।ऐसे में उन्हें हरी सब्जी, फल,सोयाबीन, चना एवं गुड़ का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था के आखिरी दिनों वाली महिलाओं को दिन में चार बार भोजन करना चाहिए, जिससे उनकी इम्यूनिटी अच्छी बनी रहे।उन्होंने बताया कि बेहतर पोषण होने से प्रसव के दौरान महिलाओं में होने वाली जटिलता में काफी कमी आ जाती है। साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी काफी कमी आ जाती है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में कोरोना काल के दौरान भी 8383 महिलाओं की योजना के तहत जांच की गई, जिसमें 1103 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया। जनपद में वर्ष 2020-21 में द्वितीय व तृतीय तिमाही वाली 7136 महिलाओं ने योजना के तहत लाभ प्राप्त किया ।