बंद पड़े क्रय केंद्र, मुसीबत बनी गेहूं बिक्री
~जिले में कोरोना के हालातों से किसान तबका भी त्रस्त है। सरकारी क्रय~

बंद पड़े क्रय केंद्र, मुसीबत बनी गेहूं बिक्री
~जिले में कोरोना के हालातों से किसान तबका भी त्रस्त है। सरकारी क्रय~
एटा: जिले में कोरोना के हालातों से किसान तबका भी त्रस्त है। सरकारी क्रय केंद्रों का बुरा हाल तो वहीं किसानों को आनलाइन पंजीकरण से पूर्व खतौनी सत्यापन की प्रक्रिया परेशान किए है। खतौनी सत्यापन के नाम पर वसूली तथा तहसील के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। हाल यह है कि जिले के 60 फीसद गेहूं क्रय केंद्रों पर नियमित खरीद नहीं हो रही। तमाम केंद्रों पर ताले पड़े हैं।

यहां बता दें कि एक अप्रैल से जिले में गेहूं खरीद के लिए 89 क्रय केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस बार पारदर्शिता के लिए केंद्रों पर लेखपालों को नोडल अधिकारी बनाया गया। वहीं पंजीकरण के लिए किसानों को खतौनी का सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया। हाल यह है कि जिले में 75 फीसद गेहूं की फसल किसान घर ले जा चुके हैं। लेकिन सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने में तमाम दिक्कतें आ रही हैं। जहां खतौनी सत्यापन के लिए तहसीलों के चक्कर लगाते किसान परेशान हैं। वहीं उनका शोषण भी किया जा रहा है। गेहूं क्रय केंद्रों की बात करें तो पहले चुनाव और अब कोरोना महामारी में प्रशासनिक अधिकारियों की व्यस्तता से केंद्र प्रभारी भी केंद्र बंद कर मौज कर रहे हैं। कहीं वारदाना न होने की शिकायत और जहां वारदाना है, वहां केंद्र पर लटके ताले मुसीबत बढ़ा रहे हैं।

सबसे बड़ी समस्या इस बात की है कि किसानों को गेहूं बेचने के लिए टालमटोल की जा रही है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी नंदकिशोर ने बताया कि खरीद जारी है। किसानों को पंजीकरण करा लेने चाहिए। केंद्रों पर कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। केंद्रों की मानीटरिग कराई जा रही है। अब तक 3261 मीट्रिक टन गेहूं खरीद भले ही शासन ने इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य तय नहीं किया, लेकिन गेहूं खरीद प्रक्रिया काफी धीमी है। 1 अप्रैल से अब तक 3161 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो सकी है। वहीं इस एवज में किसानों को 6.29 करोड़ के सापेक्ष सिर्फ 15 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। यह बोले किसान

  • किसानों को गेहूं बिक्री के लिए एसडीएम दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहां पंजीकरण कराने के लिए सुविधा शुल्क देकर भी पंजीकरण नहीं हो रहा, जिससे गेहूं बेच सकें।

सर्वेश कुमार

  • वैसे भी अब कोरोना परेशान कर रहा है। विपरीत हालातों में जैसे-तैसे फसल घर आने के बाद सरकारी समर्थन मूल्य पाने के लिए तमाम परेशानी हो रही है।

सुरेशचंद्र

  • सरकार की मंशा से यही लगा कि इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य आसानी से मिल जाएगा। हाल यह है कि पंजीकरण भी आसानी से नहीं हो रहे। गेहूं बिकने के बाद भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

पुष्पेंद्र सिंह

  • प्रशासन को चुनाव कराने से ही फुर्सत नहीं है। उधर किसानों का शोषण, उत्पीड़न रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। क्रय केंद्रों पर कोरोना गाइड लाइन का भी पालन नहीं हो रहा।

पप्पू यादव

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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