
” #आजतुमबहुतयादआये..!”
- युवा नेता अनुपम अड़ंगा की 19वी पुण्यतिथि*
एटा । पश्चिमी उत्तर प्रदेश की वैश्य राजनीत में अनुपम अड़ंगा वह नाम है 21वी सदी के शरुआती वर्षोँ मे वैश्य राजनीत कद्दावर क्षत्रप के रूप मे जाने जाते थे। परन्तु एटा जिले की षणयंत्र पूर्ण राजनीत ने उनकी आज के ही दिन क्रूरता पूर्ण ढंग से जान ले ली । आज उंनकी 18वी पुण्य तिथि पर स्मरण कर श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस अवसर उनके परिचय के रूप में नई पीढ़ी कुछ अनछुए पहलू से बाबस्ता कराना जरूरी है।अनुपम अड़ंगा का जन्म 1 जून 1962 को माहौर वैश्य राजनीत के स्तम्भ स्व शंकर लाल अड़ंगा के परिवार मे रमेश चंद्र अड़ंगा के परिवार में हुआ।छात्र जीवन से अनुपम युवा गतिविधियों में सक्रिय रह कर खेल जगत समूहों से जुड़े रहते थे। उनकी शिक्षा बी काम वाष्णेय डिग्री कालेज अलीगढ़ मे हुई।जहां उन्होंने ग्रामीण छात्र संगठन की नींव रखी यहाँ ग्रामीण छात्रों के उत्पीडन को लेकर छात्रों को मजबूत किया।1982 में पिता की असमय मृत्यु के बाद पारिवारिक दायित्व के एटा घर पर आगये ।यहां विकास विभाग में एकाउंटेंट की नोकरी कर ली 11 वर्ष निरन्तर नोकरी करने के बाद इनका मन फिर राजनीत की तरफ उन्मुख हुआ।1993 मे नोकरी से त्यागपत्र देकर व्यापार जगत की सक्रिय राजनीति में आ गये यहाँ आकर व्यापार संगठन सहित सहकारिता राजनीत में बेहतर मुकाम बनाया।
बाल्य काल से बाबा पीर फकीर औलिया औघड़ संतो में आस्था रखने बाले अनुपम अड़ंगा धार्मिक आयोजन में अधिक संलग्न रहते थे।कहा तो यह भी जाता इसी आस्था के बूते सन 2000 के निकाय चुनावों मे शहर के चेयरमैन बने । राजनीत के उच्च शिखर तक इनका नाम फ़ैल गया।यद्यपि इससे से पूर्व यह चुनाव लड़ा जिसमे अपने सजातीय प्रतिद्वन्दी होने के बाद भी 3000 हजार मत अपने युवा रसूख से हासिल किये परन्तु विजय सन 2000 में मिली जब पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की राक्रपा का परचम लेकर आगे बढे ।बताते उन दिनों बाबू जी की राक्रपा के स्टार प्रचारक बन गए थे उन दिनों वैश्य बहुल इलाकों में कल्याण सिंह जब जाते थे तो अनुपम अड़ंगा हेलीकाप्टर में साथ होते थे । ब्रज मंडल और पश्चमी उत्तर प्रदेश की वैश्य राजनीत मे अड़ंगा का नाम युवा हनक का पर्याय बन गया था।
परन्तु नियति राजनैतिक षणयंत्र की बलिबेदी तैयार कर चुकी थी । 24 अप्रेल 2002 को इसी शहर मे क्रूरतम हत्या कर दी गई।
वैश्य राजनीत ने अपना देदीप्यमान सितारा खो दिया जिसकी पूर्ति अभी तक 19सालों मे भी नही हो सकी ।
आज अनुपम अड़ंगा की पुण्य तिथि पर यादों के झरोखों से फिर श्रद्धानवत नमन ! खालिद शरीफ के इस शेर की इस मशहूर शेर के साथ….!
” वो बिछड़ा कुछ इस अदा से, रुत ही बदल गई,
इक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया।”
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