तीन महीने में पांच लाख रुपये से अधिक के टीके बर्बाद

तीन महीने में पांच लाख रुपये से अधिक के टीके बर्बाद
एटा। एंटी कोरोना टीकों की किल्लत के बीच यहां बड़े स्तर पर इसकी बर्बादी हुई है। 16 जनवरी से टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया। विभिन्न चरणों में अब तक करीब 74 हजार लोगों को टीके लगाए गए हैं। इस दौरान 3621 डोज बर्बाद हो गईं, जिसमें सरकार को सीधे-सीधे 5.43 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सबसे पहले हेल्थ वर्कर का टीकाकरण करने के निर्देश दिए गए। जिले में 5386 हेल्थ वर्करों का टीकाकरण किया गया। इसके बाद 6985 फ्रंटलाइन वर्कर का टीकाकरण हुआ। बाद में 61678 बुजुर्ग व 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को टीके लगा गए। इनके टीकाकरण के दौरान 3167 डोज बर्बाद हुईं।

एक डोज की कीमत 150 रुपये
कोरोना वैक्सीन की एक डोज के लिए सरकार को 150 रुपये का भुगतान कंपनी को करना होता है। सरकारी अस्पतालों में आमजन के लिए यह नि:शुल्क है जबकि निजी केंद्रों पर 250 रुपये का शुल्क अदा करना होता है।
ऐसे होती है बर्बादी
कोवैक्सीन वायल में 20 और कोविशील्ड में 10 डोज होती हैं। डीआइओ डॉ. राम सिंह ने बताया कि वायल खुलने के बाद चार घंटे में इसका उपयोग हो जाना चाहिए। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इकट्ठे नहीं आते। समय बीतने के बाद वायल में बची हुई दवा बेकार हो जाती है

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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