पूरे जनपद में कोरोना संक्रमण ने पसारे पांव शहर से लेकर गावों तक मचा हा हा कार

जहर की तरह फ़ैल रहा एटा में कोरोना, 24 घटे में 186 संक्रमित
पूरे जनपद में कोरोना संक्रमण ने पसारे पांव शहर से लेकर गावों तक मचा हा हा कार

एटा जनपद मुख्यालय शहर से लेकर गावों तक कोरोना ने फिर से पांव पसारना प्रारंभ कर दिया है। दिनो दिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में बढोत्तरी हो रही है। जिला प्रशासन उसकी रोकथाम के स्थान पर सिर्फ कागजी आकडेवाजी में उलझा है।जिला चिकित्सालय से लेकर पूरे शहर में खुलेआम कोरोना के मरीज व कोरोना भ्रमण कर रहा है।

कुल पाॅजिटिव 3312

मुख्य चिकित्साधिकारी अरविन्द गर्ग के कार्यालय से मिले कोरोना संक्रमितों के आंकडों के अनुसार जनपद में आज महिला पुरूषों सहित 186 लोग पोजिटिव पाये गये हैं वही जनपद में कुल पाॅजिटिव मरीजों की संख्या 3312 पहुंच गयी है जबकि प्रशासनिक आंकडोके अनुसार जनपद में अबतक 33 लोगों की कोरोना पोजिटिव होने से मौत हो चुकी है।

जाँच केन्द्रो से भी फ़ैल रहा कोरोना

आपको बताते चले कि जनपद मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय में कोविड-19 की जांच काफी लम्बे समय से की जा रही है किंतु यहां हो रही जांच मैं संक्रमण की रोकथाम की व्यवस्था कम उसे फैलाने का कार्य कम फैलाया ज्यादा जा रहा है।

जिला चिकित्सालय लोग अपनी जांच कराने आते हैं किंतु वहाँ उन्हें जिला चिकित्सालय व प्रशासन की अनदेखी के चलते जबरन संक्रमित होने को मजबूर होना पड़ता है। जाने ऐसा क्यों होता है?

क्यों?

जिला चिकित्सालय में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्धारा चिकित्सालय में कोविड-19 जांच का कैंप ऐसे स्थान पर लगाया गया है। जहाँ से चिकित्सालय में आने व जाने वाले मरीजो का कैम्प पर कोविड-19 जाँच कराने वाले मरीजो का सीधा एक दूसरे स सम्पर्क रहता है। चाहे पर्चा बनवाने का काम हो चाहे टैस्ट कराने का। दोनो ही स्थित में संक्रमित व बिना संक्रमित मरीजों को बिना चाहे एक दूसरे के सम्पर्क में आना ही पढता है।

गाइडलाइन्स की उदा दी जाती है धज्जियाँ

कोविड-19 की जांच के समय वहा शोसल डिस्टेंसिग का विल्कुल पालन नही किया जाता है और न लाइन ही सही एवं संख्या के आधार पर बनाई जाती है। संक्रमित व बिना संक्रमित मरीज पूरे दिन एक दूसरे के साथ आराम से घूमते रहते हैं जो पूरे जनपद में संक्रमण फैलाने में काफी सहायक है।

साथ ही किसी भी चिकित्सालय में सैनेटाइज करने की कोई व्यवस्था नहीं है और न संक्रमित की अलग रहने की व्यवस्था

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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