सकरौली में खारे पानी की समस्या, जिम्मेदार मौन

सकरौली में खारे पानी की समस्या, जिम्मेदार मौन
~पूरे गांव में मीठे पानी का सिर्फ एक ही हैंडपंप बड़ी आबादी रहती इस पर निर्भर~
एटा: जलेसर विकास खंड के गांव सकरौली में पंचायत चुनाव के दौरान वर्षो पुरानी खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने की मांग उठी है।

पूरे गांव में मीठे पानी का एक ही हैंडपंप है। बड़ी आबादी इस पर निर्भर है। ग्रामीणों की मानें तो मीठे पानी के लिए पर्याप्त प्रयास किसी ने भी नहीं किए। इस बार मतदाता कह रहे हैं कि पहले मीठे पानी का वादा करो, तब वोट देंगे।

ग्राम पंचायत सकरौली की आबादी पांच हजार से ऊपर है। गांव में कई हैंडपंप लगे हैं, लेकिन उनका पानी खारा है। इस पानी को पशु भी नहीं पीते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि जब कोई रिश्ता करने आता है तो खारे पानी की समस्या पर जरूर चर्चा करता है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इसी समस्या के कारण गांव छोड़कर चले गए।

गांव की चौपाल पर बैठे बुजुर्ग रामसेवक सिंह बताते हैं कि जब से उन्होंने होश संभाला है तब से ही यह समस्या चली आ रही है। गांव के बाहर सड़क किनारे एक हैंडपंप ऐसा है, जिसका पानी मीठी है। गांव की बड़ी आबादी इसी के सहारे पानी पी रही है। फिर दूसरे गांवों में पानी लाना पड़ता है। पंचायत स्तर से इस समस्या का समाधान करने की कोशिश आज तक नहीं की गई। हालांकि ओवरहेड टैंक यहां है, लेकिन इसमें पानी ही नहीं भरा जाता है। मतदाताओं का कहना है कि हमें सिर्फ मीठा पानी चाहिए। प्रत्याशी जब वोट मांगने जाते हैं तो सबसे ज्यादा सवाल खारे पानी को लेकर ही करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ओवरहेड टैंक से हर घर को जोड़ना चाहिए। इसके लिए मुफ्त कनेक्शन दिए जाएं तो कुछ हद तक खारे पानी से निजात मिल सकती है। मतदाता बोले

  • पिछले वर्षो में चुने गए प्रधानों भले ही गांव में सड़क बनवाई हो। अन्य विकास कार्य किए हों, लेकिन मीठा पानी उपलब्ध नहीं कराया। खारे पानी की समस्या को लेकर संजीदा नहीं हुए।

यशपाल सिंह

  • हम सब चाहते हैं कि इस बार प्रधान ऐसा हो, जो खारे पानी की समस्या से निजात दिलाए। प्रशासन से लेकर शासन तक ग्रामीणों की आवाज पहुंचा सके, अब ऐसे प्रधान की ही जरूरत है।

दलवीर सिंह

-वर्षों से हम मीठे पानी के लिए भटक रहे हैं। गांव में जब मीठे पानी वाला हैंडपंप खराब हो जाता है तो तीन किलोमीटर दूर से भी पानी लाना पड़ता है।

भूपेंद्र सिंह

-सकरौली में जो गांव के बाहर मीठे पानी वाला हैंडपंप है। उस पर आसपास के गांवों के लोग भी पानी भरने आते हैं। इस वजह से सुबह से लेकर रात तक भीड़ देखी जा सकती है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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