
जनपद एटा का दुर्भाग्य था कि तुम थे….
एटा के प्रशासनिक इतिहास मे एसा पहली बार हुआ है कि जिले से जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के स्थानातरण होने पर दोनो अधिकारियों को किसी जिले का चार्ज ही नहीं मिला हो,
कोरोना महामारी के दौरान ही लगभग जिले के दोनो अफ़सरो की पोस्टिन्ग एटा जनपद मे हुई थी लेकिन देखते-देखते एटा मे बदहाली का दौर शुरु हो चुका था,
जहा पुर्व जिलाधिकारी श्री अमित किशोर व श्री आई.पी.पान्डे के द्वारा जनपद एटा को बेहतरी के दौर मे ले जाने का श्र्रे मिला वही प्रोमोटी IAS सुखलाल भारती के द्वारा जिले को रसातल मे ले जाने का दौर शुरु किया था,
अगर प्रशासन सो जाये तो रक्षक ही चोर बन जाते हैं
उत्तर प्रदेश मे जिस जिले की पुलिस को शराब माफ़िया बोला जा रहा है,उस जिले की कमान तत्कालिन जिलाधिकारी सुखलाल भारती के हाथो मे थी,और वो दौर था लोकडाउन का |
इसी दौर मे थानो की पुलिस ने शराब के धन्धे को अपना कर अपने बड़े अफ़सरो की जेबो को भरा और आज एटा पुलिस पुरे प्रदेश भर मे बदनाम हुई है|
थाना कोतवाली देहात के थानेदार इन्द्रेश पाल सिंह ने तो एक थाने को छोड़…जिले के पांच थानो की बागडोर सम्भाल रखी थी,जिसे जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह ने अपने सरक्षण मे पाला पोसा था,
……और यही कारण रहा कि शासन की नजर से SSP सुनील कुमार सिंह इतने गिरे की चुनाव के दौरान किसी जिले के काबिल नही समझा,जिससे सुनील कुमार सिंह को मुख्यालय मे तैनात किया गया है,
इस समय के IPS स्थानातरण सूची को देखे तो सिर्फ़ सुनील कुमार सिंह ही इकलोते प्रोमोटी IPS है जिन्हे किसी जिले के काबिल नही समझा गया है,कही हद तक इस पुरे खेल का खिलाड़ी इन्द्रेश पाल सिंह को माना जाये तो गलत नहीं है,अगर शराब की तस्करी नही होती तो शायद SSP सुनील कुमार सिंह अभी और जिले को दुर्भाग्य देकर जाते,
ASP राहुल कुमार ने जिले को गर्त मे गिरने से सम्भाला
जब से देहात कोतवाली पर जाच की आन्च आई है प्रदेश के निर्देश पर ASP राहुल कुमार द्वारा जिले को कही हद तक सम्भाला है,व जो भी जाच के दायरे मे आ रहे हैं सभी को जेल तक पहुंचाने का कार्य भी तेजी से कर रहे है,
जिलाधिकारी डाoविभा चहल के आने से…..
जिलाधिकारी डाo विभा चहल के आने के बाद जिले मे बड़े स्तर पर हो रहे अवैध धन्धो पर अंकुश लगा है वही शासन स्तर से भी SSP एटा को हटा कर साफ़ कर दिया है कि जनपद मे किसी भी तरह की गन्दगी नही चाहिए,और लगभग जिले मे शराब माफ़ियाओ को पुलिस गुप्त रुप से तलाश भी कर रही है,जिसमे लगभग सफ़लता भी मिली है,
आरोपी इन्द्रेश पाल सिंह के पैत्रक आवास पर छापा मार कार्यवाही से साफ़ इशारा है कि शासन किसी को छोड़ने के इरादे में नहीं है,
सुत्रो की खबर….
सुत्र बताते है कि अगर आरोपी इन्द्रेश पाल सिंह की गिरफ्तारी होती है तो कुछ पत्रकारो के नाम भी सामने आने की संभावना बन रही हैं क्यूकि इस खेल मे जिले के एक दो पत्रकार भी इस शराब के खेल मे शामिल होते नजर आ रहे हैं क्यूकि पुरे खेल मे एटा पोस्टिन्ग तक इन्द्रेश पाल सिंह को लाने मे शराब माफ़ियाओ के अलावा भी कुछ सफ़ेदपोश लोगो के हाथ भी थे,जैसा कि बताया जा रहा है कि इन्द्रेश पाल सिंह के स्थानातरित होने मे प्रदेश सरकार के किसी सान्सद का फ़र्जी तरीके से लेटर पेड प्रयोग मे लिया गया था,जाच का दायरा अभी और बढ़ने की तरफ़ है,
देहात कोतवाली का नशा पुरे शबाब पर है…
यह भी हो सकता है कि सभी आरोप गलत हो सकते हैं शायद सम्भावना यह भी हो सकती है कि शराब की जाच सही तरीके से ना हुई हो परंतु 26/3/2021 देहात कोतवाली मे पवन कुमार नाम के सिपाही ने थाने मे तैनात दरोगा N.D.tiwari को जाति सुचक गालिया दी और थानेदारी सिखाने का पाठ पढाने की नसीहत दी और वीडियो वायरल हुआ इससे यही साबित होता है कि देहात कोतवाली थाना नही था…चम्बल का अखाड़ा है, जहा कि सफ़ाई नही की गई तो और भी कारनामे होते रहेगे,फ़िलहाल उक्त मामले मे जाच प्रारम्भ हो चुकी है,