
लाकडाउन: पहले केस मिलते ही एक दर्जन गांवों ने सहा था दर्द
~ओरनी की महिला और गनेशपुर के दो युवक सर्वप्रथम हुए संक्रमित एक से तीन किमी तक के दायरे में बन गए थे कर्फ्यू के हालात~
एटा:
कोरोना की दस्तक सबसे पहले मारहरा और जलेसर विकासखंड क्षेत्र में हुई। दो गांवों में तीन मरीज पाए गए। इसके बाद एक दर्जन गांवों ने प्रतिबंधों का दंश झेला। इन दोनों गांवों में तमाम तरह की बंदिशें लगाई गईं। वहीं, इनके एक से तीन किमी के दायरे तक कर्फ्यू जैसे हालात बन गए। इन गांवों के लोगों ने 28 दिन बमुश्किल काटे थे।
जिले के लोगों ने कोरोना संक्रमण और इसके मरीजों के बारे में महज सुना ही था। सामना 18 अप्रैल, 2020 को हुआ तो गले सूख गए। माथे पर चिता की लकीरें उभर आईं और अपनी सुरक्षा को लेकर दिमाग में हथौड़े की तरह सवालों की चोट पड़ने लगी। मारहरा क्षेत्र के गांव ओरनी की एक महिला और जलेसर क्षेत्र के गांव गनेशपुर के दो युवकों की जांच रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद रात भर इन गांवों में एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियों के हूटर गूंजते रहे। जिसके चलते अधिकांश लोगों को नींद तक नहीं आई। रात में ही इन दोनों गांवों को हाटस्पाट घोषित कर दिया गया। गांव ओरनी के एक किमी और गनेशपुर के तीन किमी के दायरे में एक दर्जन गांव सील कर दिए गए। कदम-कदम पर पुलिसबल तैनात था। जो लोग जरूरी कामों से निकले, उन्हें पुलिस के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। साथ ही पुलिस ने उन्हें संक्रमण का खतरा समझाते हुए घरों के लिए वापस कर दिया। कहा गया कि डोर स्टेप डिलीवरी के जरिए प्रशासन द्वारा राशन व अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जाएगा, लेकिन यह व्यवस्थाएं कारगर नहीं थीं।