
झारखंड में चतरा के हंटरगंज प्रखंड के कटैया गांव में धर्म बदल कर ईसाई बन चुके 50 पुरुष और महिलाएं मंगलवार को सनातन धर्म में वापस लौट आए ।
कटैया गांव में स्थित मां देवी मंडप में उन्हें वैदिक रीति-रिवाज और संस्कारित किया गया। सैकड़ों लोग इस कार्यक्रम में मौजूद रहे और इसके गवाह बने।
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बाद में इन सभी महिलाओं व पुरूषों ने सनातन धर्म में वापस लौटने पर कहा कि वह लोभ-लालच के चक्कर में पड़ गए थे और ईसाई धर्म अपना लिया था। इनका कहना है कि ईसाई धर्म में हम अपने आप को घुटन जैसा महसूस कर रहे थे। जब हमें आत्ममंथन के बाद अपनी गलती का एहसास हुआ तो फिर हम सब ने अब प्रायश्चित की ठानी है।
सनातन धर्म में वापस लौटने वालों में कलावती देवी, सुनीता देवी (पति मनोज यादव), मनीता कुमारी, बेलपतिया देवी, बेबी देवी (पति राजेंद्र भारती), सुनीता देवी ( पति संजय यादव), कांति देवी, बेबी देवी (पति सीताराम दास), कौशल्या देवी, रीता देवी, सवंती देवी, सावित्री देवी, पार्वती देवी, वंदना देवी, रामपति देवी, मिनी देवी, संगीता देवी, बसंती देवी, उदय देवी, सुनीला देवी, सकुंती देवी, चमेली देवी, मनवा देवी, गुड्डी देवी, मोदी देवी, देववंती देवी, बसंती देवी (राजदेव पासवान), सुनीता देवी, अनीता देवी, पिंटू यादव, कैली देवी, वीरेंद्र चौधरी, छठन चौधरी, मुनवा देवी, पुनिया देवी, महेंद्र भारती, नरेश भारती, उपेंद्र यादव, रामस्वरूप यादव, शंकर भुइयां, सुकर भुइयां, अखिलेश दांगी, आदित्य यादव, पुन यादव, गोदावरी देवी, मुनिया देवी, मंजू देवी, जीरवा देवी, प्रतिमा देवी और सोना देवी (सभी ग्राम कटैया, थाना वशिष्ठनगर, जिला चतरा) के नाम शामिल हैं।
सनातन धर्म में वापस लौटने के बाद सीताराम दास की पत्नी बेवी देवी ने कहा कि हम कुछ गंभीर बीमारियों से परेशान थे जिसके चलते इलाज कराने घंघरी जा रहे थे। तभी पड़ोस के एक गांव के दो ईसाई धर्म प्रचारकों से भेंट हुई।
उन्होंने हमें बताया कि ईसाई धर्म अपना कर परमेश्वर (भगवान) की प्रार्थना करो, सब ठीक हो जाएगा। हमने वैसा ही किया, मगर इससे कोई लाभ नहीं हुआ। सब छलावा जैसा लगा। फिर सोच-विचार के बाद अपने मूल धर्म सनातन में वापस लौटने का फैसला किया