बगैर आवाज के दुश्मन तक पहुंचेंगी मिसाइलें, SFDR तकनीक का सफल परीक्षण

बगैर आवाज के दुश्मन तक पहुंचेंगी मिसाइलें, SFDR तकनीक का सफल परीक्षण

सुरक्षा के मामले में भारत लगातार नए आयाम छू रहा है. इसी क्रम में आज देश को एक और सफलता मिली है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज में सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का फ्लाइट टेस्ट किया. अच्छी खबर है कि यह परीक्षण सफल रहा. इस तकनीक से भविष्य में भारत की मिसाइलों के और भी ज्यादा ताकतवर होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

डीआरडीओ ने एसडीएफआर का सफल फ्लाइट परीक्षण कर लिया है. डीआरडीओ की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, यह परीक्षण आज सुबह 10.30 बजे हुआ है. दरअसल, यह एक तरह का बूस्टर इंजन है, जो मिसाइल को और ताकतवर बनाने में मदद करेगा. सुरक्षा में बेहतर उपकरणों के अलावा भारत स्वदेशी भी तेजी से अपना रहा है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक है. डीआरडीओ की तरफ से किए गए ट्वीट में बताया गया है कि ग्राउंड बूस्टर समेत सभी सिस्टम्स ने अपेक्षा के अनुरूप ही काम किया है.

रैमजेट तकनीक के इस्तेमाल के बाद मिसाइल की ताकत में इजाफा होगा. बताया जा रहा है कि यह मिसाइल की रफ्तार को और तेज कर देगी. इतना ही नहीं तकनीक के इस्तेमाल के बाद दुश्मनों की ओर बढ़ती हुई मिसाइल से आवाज नहीं आएगी. साथ ही ये आसमान में उड़ते वक्त धुंआ नजर नहीं आएगा. यानि आवाज और धुएं के ट्रेस के जरिए दुश्मन के लिए मिसाइल का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा. रैमजेट तकनीक डीआरडीओ को लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल तैयार करने में मदद करेगी.

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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