शाहजहाँपुर को मिला अपना पहला विश्वविद्यालय नेतृत्व, डॉ. पी. बी. सिंह बने स्वामी शुकदेवानंद राज्य विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति


बरेली, शाहजहाँपुर। जिले के शैक्षिक इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। मुमुक्षु आश्रम परिसर में स्थापित नवगठित स्वामी शुकदेवानंद राज्य विश्वविद्यालय को अपना पहला नेतृत्व मिल गया है। उत्तर प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री कार्यालय की स्वीकृति के बाद डॉ. पी. बी. सिंह को विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया है।
वर्तमान में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग में कार्यरत डॉ. सिंह शिक्षा प्रशासन और प्रबंधन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं। वे पूर्व में कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए इस नई शैक्षणिक संस्था की नींव मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी।
इस नियुक्ति के साथ विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा लगभग पूर्ण हो गया है, क्योंकि इससे पहले कुलसचिव और वित्त अधिकारी भी अपना कार्यभार संभाल चुके हैं। अब विश्वविद्यालय का ध्यान आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियों और संस्थागत विस्तार पर रहेगा।
डॉ. सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती शाहजहाँपुर जनपद के लगभग 60 महाविद्यालयों के सफल हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करना होगी। अभी तक ये महाविद्यालय रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध रहे हैं, लेकिन नए विश्वविद्यालय के संचालन के बाद यह व्यवस्था बदल जाएगी। इससे शाहजहाँपुर एक स्वतंत्र शैक्षिक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित करेगा।


इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय छात्र-छात्राओं को मिलेगा। अब प्रवेश, परीक्षा, अंकपत्र और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए उन्हें दूसरे जिलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा संबंधी व्यवस्थाएँ उपलब्ध होने से छात्रों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे।
मुमुक्षु आश्रम प्रबंधन तथा जिले के प्रबुद्ध वर्ग ने डॉ. पी. बी. सिंह की नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे शाहजहाँपुर के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि यह विश्वविद्यालय आने वाले समय में न केवल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि शोध, नवाचार और अकादमिक विकास के नए अवसर भी तैयार करेगा।

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पं.सत्यम शर्मा

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