मासूम इशानी दुनिया की दुर्लभ बीमारी से ग्रसित, एम्स में चल रहा इलाज

यूपी (मेरठ) : मासूम इशानी दुनिया की दुर्लभ बीमारी से ग्रसित, एम्स में चल रहा इलाज

  • बचाने के लिए चाहिए 22 करोड़; परिवार ने क्राउड फंडिंग का सहारा लिया

मुंबई की तीरा कामत के बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ में रहने वाली डेढ़ साल की ईशानी भी दुनिया की दुर्लभ बीमारियों में से एक स्पाइनल मस्क्युलर अट्राफी टाइप-2 (एसएमए ) की पुष्टि हुई है। जिसका इलाज अमेरिका से आने वाले जोल्जेंसमा इंजेक्शन से ही मुमकिन है। इसका कीमत 16 करोड़ रुपए है। इस पर 6 करोड़ रुपए टैक्स अलग से चुकाना पड़ता है। तब इसकी कीमत 22 करोड़ रुपए हो जाती है। ईशानी के माता-पिता बेटी का इलाज क्राउड फंडिंग के जरिए आस लगाए हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर मदद की अपील की है, जिस पर मदद आना भी शुरु हो गई है। हालांकि अभी तक महज 80 रुपए जुटे हैं, जो काफी कम हैं।

ज्ञातव हो कि ईशानी के पिता अभिषेक शहर के ब्रहमपुरी इलाके की मास्टर कालोनी में रहते हैं। अभिषेक दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। जबकि उनकी पत्नी नीलम गृहिणी हैं। इस समय ईशानी का इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा है। ईशानी इस समय करीब डेढ़ साल की है। उसका जन्म अगस्त 2019 में हुआ था। पिता अभिषेक के मुताबिक जन्म के बाद सात से आठ महीने तक ईशानी एक सामान्य बच्चे की तरह थी। लेकिन इसके बाद उसके पैरों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया। इस समय पैर बिल्कुल भी काम नहीं करते हैं। थोड़ी सी हरकत पैरों के पंजों में है। इस बीमारी का असर ईशानी के हाथों पर भी पड़ने लगा है।

अभिषेक के मुताबिक उन्होंने 26 दिसंबर 2020 को एम्स में ब्लड सैंपल दिया। यह रिपोर्ट इस साल 12 जनवरी को आई और डॉक्टरों ने स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी स्टेज-2 की पुष्टि की है। ईशानी के परिजनों के मुताबिक इस बीमारी के इलाज के लिए जो टीका लगता है उसकी कीमत टैक्स समेत 22 करोड़ रुपए बतायी गई है। वह स्वयं इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा सकते हैं, इसलिए बेटी के इलाज में मदद के लिए सोशल मीडिया पर गुहार लगाई है।

दरअसल स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (एसएमए) बीमारी वाले बच्चों के शरीर में प्रोटीन बनाने वाला जीन नहीं होता। इससे मांसपेशियां और तंत्रिकाएं (Nerves) खत्म होने लगती हैं। दिमाग की मांसपेशियों की एक्टिविटी भी कम होने लगती है। ब्रेन से सभी मांसपेशियां संचालित होती हैं, इसलिए सांस लेने और खाना चबाने तक में दिक्कत होने लगती है। एसएमए कई तरह की होती है। देश में अभी तक 5 लोगों और दुनिया में करीब 600 लोगों को एसएमए बीमारी के इलाज के लिए जोल्जेंसमा का इंजेक्शन लगा है। जिन्हें लगा उन्हें भी 60 % ही फायदा मिला।

जानकारों की मानें तो स्विटजरलैंड की कंपनी नोवार्टिस जोलगेन्स्मा यह इंजेक्शन तैयार करती है। नोवार्टिस कंपनी दुनियाभर के 50 लोगों को यह दवाई मुफ्त में देती है, लेकिन वह रेंडमली सेलेक्टेड मरीजों को ही मिलती है। ईशानी का रजिस्ट्रेशन मुफ्त मिलने वाले टीके की प्रक्रिया के लिए कर दिया गया है, लेकिन उसके लिए इंतजार करना बेटी की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ईशानी के पिता अभिषेक ने मदद के लिए सोशल मीडिया पर मदद के लिए कैंपेन शुरू कर दिया है। इसके लिए मिलाप और इम्पैक्ट गुरू जैसी वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाकर लोगों से मदद की गुहार की है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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