सेना के अनुभवी घोड़े ‘रियो’ को मिला* सबसे बड़ा सम्मान, आर्मी चीफ ने गाजर और गुड़ खिलाकर बढ़ाया हौसला

*. सेना के अनुभवी घोड़े ‘रियो’ को मिला* *सबसे बड़ा सम्मान, आर्मी चीफ ने गाजर* *और गुड़ खिलाकर बढ़ाया हौसला।* *—————————————-* *नई दिल्ली/इंडियन आर्मी* के 61-कैवलरी के घोड़े रियो को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमंडेशन मिला है। रियो को उसकी सेवाओं के लिए यह सम्मान दिया गया। इस बार गणतंत्र दिवस परेड में जब रियो शामिल हुआ तो ये रियो की 18वीं गणतंत्र दिवस परेड थी। दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में इंडियन आर्मी के चीफ जनरल एम एम नरवणे ने रियो को सम्मानित किया। कमंडेशन कार्ड के साथ आर्मी चीफ ने रियो को गाजर और गुड़ भी दिया। *रियो इंडियन आर्मी* का पहला ऐसा घोड़ा बन गया जिसे यह सम्मान मिला है। रियो इंडियन आर्मी की 61 कैवलरी में है जो दुनिया की अकेली फंक्शनल हॉर्स रेजिमेंट है। रियो जब चार साल का था तब पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया था। पिछले 16 सालों से रियो लगातार दस्ते के कमांडर का चार्जर रहा है यानि कमांडर रियो पर सवार होकर दस्ते की अगुवाई करते हैं। 61 कैवलरी के एक अधिकारी ने कहा कि *रियो* बहुत खास है। जब कमांडर कोई कमांड देता है तो रियो ध्यान से सुनकर उसे फॉलो करता है। आम तौर पर हॉर्स रेजिमेंट से घोड़े 20 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं, लेकिन रियो 22 साल का है और अब भी अपनी सेवाएं दे रहा है। इंडियन आर्मी में 61 कैवलरी 1 अगस्त 1953 में बनी थी। तब छह राज्यों की फोर्स को मिलाकर इसे बनाया गया था। अभी यह इंडियन आर्मी की ही नहीं दुनिया की अकेली सर्विंग हॉर्स रेजिमेंट है। 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध में 61 कैवलरी को राजस्थान के गंगानगर सेक्टर में तैनात किया गया था। रेजिमेंट के पास 100 किलोमीटर से ज्यादा एरिया की जिम्मेदारी थी। वहां से एक भी घुसपैठ नहीं हुई। 1971 युद्ध के दौरान रेजिमेंट की जिम्मेदारी राष्ट्रपति भवन सुरक्षा की थी। 61 कैवलरी रेजिमेंट ने 1989 में ऑपरेशन पवन, 1990 में ऑपरेशन रक्षक, 1999 में करगिल युद्ध और 2001-2002 में ऑपरेशन पराक्रम में भी योगदान दिया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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