कुशीनगर-तमकुहीराज/भारत मे बडे पैमाने पर मनाया जाने वाला महापर्व छठ व्रत समापन महिलाओं ने सूर्य को अर्घ देकर किया।
छठ व्रत एक ऐसा महा ब्रत है जिसे 24घंटे निर्जला रहकर महिलाएं ब्रत करती है।और ब्रत का समापन सूर्य देवता को अर्घ देकर करती है।इस ब्रत का प्रचलन लगभग पूरे भारत मे है।महिलाएं अपनी मनोकामना के पूर्ति के लिए इस को करती है।और माता छठ उनकी मनोकामना पूरी करती है। इस ब्रत के पीछे प्रचलित कथाओं मेसे एक कथा आती है कि एक बार हनुमानजी वाल पन मे सूर्य देवता को निगल गए जिससे पूरी सृष्टि मे अंधेरा छा गया।सारे जीव-जन्तु तथा वनस्पतियाँ मरने लगे।उनके अस्तित्व पर संकट छा गया।सभी देवता मिलकर हनुमानजी को हाथ जोड़कर अनुनय विनय करने लगे तब हनुमानजी ने सूर्य देव को छोड़ दिया, परंतु सूर्य देवता निस्तेज हो चुके थे।उनके प्रकाश मे वह तेज नही था जो पहले हुआ करता था।तभी सभी देव मिलकर माता छठ की उत्पति की ओर उन्हें अपने2शक्ति से सम्पन्न किया।और बोले हे माता छठ आप अपने शक्ति से सूर्य देवता की खोई हुई तेजता को प्रदान करे।तबसे यह प्रचलन होगया कि सारी महिलाएं सूर्य देवता को फल फ्रूट आदि से सूर्य देवता को अर्घ देती है।