सुनिये भाई सहाब…अमेरिका के नये मालिक भारत की नीतियों के खिलाफ़ ना हो जाये…
बैसे तो अमेरिका से रिश्ते दुर से तो अच्छे ही लगते हैं लेकिन अमेरिका के लिये भारत सिर्फ़ एक मोहरा है जैसे पाकिस्तान…

अब अमेरिका के राष्ट्रपति जोइ बायडन के विषय पर भी सुन लिजिये.. क्युकि बायडन ने अपने जीवन मे इतनी त्रासदिया देखी है कि वो व्यक्तिगत रुप से डरपोक किस्म के व्यक्ति साबित हो गये हैं!
बायडन के राजनैतिक केरियर की बात करे तो बुश कार्यकाल के दौरान भी इराक मसले पर भी सद्दाम हुसैन के प्रति उनका रुख इतना नरम था कि बुश के खिलाफ़ कइ वार व्यान भी दे दिये थे,कि बुश की इराक के चरमपन्थियो पर की जा रही कार्यवाहिया अनेतिक है,फ़िर दुसरे मसले मे भी यही हुआ कि अमेरिका के पुर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के द्वारा ओसामा बिन लादेन पर सैन्य कार्यवाही के खिलाफ़ भी बायडन थे,उस समय तो बायडन ने ओबामा को बोला भी कि यह कार्यवाही नही होनी चाहिए व ना ही live रहकर इस पर नजर रखी जाये, लेकिन ओबामा ने अपने सीनेट के साथ बैठकर उस पुरे घटनाक्रम को देखा भी व अमेरिकियो से अपने किये वादे को भी पुरा किया एवम अमेरिका के इतिहास मे ओबामा ने अपना एक अलग ही स्थान बना लिया था जो आज भी यथावत् है,
अभी हाल ही मे बायडन ने कश्मीर के मुद्दे पर भी पाकिस्तान की पैरवी की थी जिसे भारत की अवाम को नजरअन्दाज नही करना चाहिये, क्युकि यही विचार विश्व पटल पर बायडन को प्रदर्शित करेगे कि एशिया मे अमेरिका भारत के साथ कितने कदम साथ खड़ा हुआ है,
बायडन के साथ भारतीय मुल की महिला कमला हैरिस के भी रुक पर ध्यान देने की जरूरत है क्युकि कमला खुद को कभी भी भारतीय मुल की ना कह कर अमेरिकन कहना ज्यादा पसंद करती हैं एसे छोटे-छोटे विचार ही अमेरिका के सामरिक सहयोग पर बहुत गहरा प्रभाव करेगे,पुर्व के सीनेट मे भी कमला अपनी उपस्थिति दे चुकी हैं जिसमे वह भारतीय होने के बावजूद भारत के साथ कही भी खडी नजर नही आती है
ps rajput
इतना समझ लिजिये कि भारत को अब बहुत सम्भल कर चलना होगा क्युकि इस समय अमेरिका का मालिक कोई व्यापारी (ट्रम्प)नही है!अमेरिका शुद्धरुप से राजनैतिक व्यक्ति के हाथ मे है. जो सिर्फ़ राजनैतिक लाभ के लिये किसी भी हद तक जा सकता है,
कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका मे नये रुप से विचार किया जायेगा ओर पाकिस्तान के रुके हुये धन को भी देने की तैयारी की जा सकती है जो भारत के लिये चिन्ता का सबब बन सकता है! इधर चीन के साथ टकराव पर ट्रम्प भारत के साथ थे तो बायडन अख्साई चीन सागर से अपने युद्धपोतो को वापिस बुला सकते हैं,
एसे ही कइ निर्णय अमेरिका मे आने वाले समय मे हो सकते है जो कि भारत के लिये सिरदर्द होगे,
बलुच के लिये की जा रही पैरवी भी खटाई मे पड़ती दिखाई दे रही है अगर एसा हुआ तो बायडन इस मुद्दे पर दुनिया के पटल पर घिर सकते है क्युकि बलुच आजादी चाहते हैं ओर भारत इस मुद्दे पर बलुचो के साथ खडा है,
आने वाले चार माह बहुत महत्वपुर्ण है जो आगे के बीस वर्ष तय करेगे की दुनिया किस करबट सोयेगी