मीडिया कल्याण बोर्ड और जिला मीडिया समन्वय समिति की स्थापना का प्रस्ताव

नई दिल्ली , [12 जून 2025 ]: भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने देश भर के पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के कल्याण एवं सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने प्रत्येक जनपद में “जिला मीडिया समन्वय समिति” के गठन और राज्य स्तर पर “मीडिया कल्याण बोर्ड” की स्थापना के साथ-साथ “पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुरक्षा कानून” को तत्काल लागू करने की जोरदार मांग उठाई है। यह मांग भारतीय मीडिया फाउंडेशन के केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक एके बिंदुसार द्वारा की गई है, जिन्होंने मीडियाकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया।
मीडिया कल्याण बोर्ड:
एक व्यापक समर्थन तंत्र
भारतीय मीडिया फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित “मीडिया कल्याण बोर्ड” एक राज्य-स्तरीय निकाय होगा जिसका प्राथमिक उद्देश्य पत्रकारों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा करना और उनके कल्याण को सुनिश्चित करना है। यह बोर्ड निम्नलिखित कार्यों को संपादित कर सकता है:
वित्तीय सहायता: पत्रकारों, विशेषकर ग्रामीण और छोटे शहरों में कार्यरत पत्रकारों को आकस्मिक चिकित्सा व्यय, शिक्षा और अन्य आपात स्थितियों में वित्तीय सहायता प्रदान करना।
आवास योजनाएं: पत्रकारों के लिए किफायती आवास योजनाओं का प्रस्ताव और कार्यान्वयन।
पेंशन और बीमा: पत्रकारों के लिए पेंशन योजनाएं और स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कवरेज सुनिश्चित करना।
प्रशिक्षण और कौशल विकास: पत्रकारों को नवीनतम मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता के सिद्धांतों में प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करना।
कानूनी सहायता:
पत्रकारों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उत्पन्न होने वाले कानूनी मुद्दों में सहायता प्रदान करना।
शिकायत निवारण: पत्रकारों से संबंधित शिकायतों का समाधान करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना।
नैतिकता और मानकों का संवर्धन:
पत्रकारिता में उच्च नैतिक मानकों को बढ़ावा देना और व्यावसायिक आचरण संहिता को लागू करना।
यह बोर्ड सरकार, मीडिया घरानों और पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल कर एक बहु-हितधारक दृष्टिकोण अपना सकता है, ताकि पत्रकारों के लिए एक समग्र और स्थायी समर्थन प्रणाली बनाई जा सके।
जिला मीडिया समन्वय समिति: जमीनी स्तर पर संवाद और सहयोग
प्रत्येक जनपद में “जिला मीडिया समन्वय समिति” का गठन एक महत्वपूर्ण कदम है जो जमीनी स्तर पर मीडिया और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा। यह समिति निम्नलिखित भूमिकाएं निभा सकती है:
प्रशासन और मीडिया के बीच पुल:
यह समिति जिला प्रशासन और स्थानीय पत्रकारों के बीच एक प्रभावी संवाद सेतु के रूप में कार्य करेगी। इससे सूचना के आदान-प्रदान में पारदर्शिता आएगी और गलतफहमी कम होगी।
स्थानीय मुद्दों पर सहयोग:
समिति स्थानीय मुद्दों को कवर करने में पत्रकारों को सहयोग प्रदान करेगी और उन्हें आवश्यक जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।
सुरक्षा और सुविधा:
यह समिति पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
शिकायत निवारण:
स्थानीय स्तर पर पत्रकारों से संबंधित शिकायतों का समाधान करना और उन्हें उचित मंच प्रदान करना।
आपसी समझ को बढ़ावा:
समिति स्थानीय मीडिया परिदृश्य में आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देगी, जिससे स्वस्थ पत्रकारिता का विकास होगा।
नियमित बैठकें:
समिति नियमित बैठकें आयोजित कर सकती है जिसमें पत्रकार, प्रशासन के अधिकारी और पुलिस के प्रतिनिधि शामिल हों, ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।
पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुरक्षा कानून:
एक अनिवार्य आवश्यकता
भारतीय मीडिया फाउंडेशन की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक “पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुरक्षा कानून” को लागू करना है। हाल के वर्षों में, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमलों, धमकियों और उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे उनके लिए स्वतंत्र रूप से काम करना मुश्किल हो गया है। प्रस्तावित कानून निम्नलिखित प्रावधानों को शामिल कर सकता है:
सुरक्षा सुनिश्चित करना:
पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान शारीरिक हमलों, धमकियों और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना।
त्वरित जांच और दंड:
इन पर होने वाले हमलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और दोषियों को कठोर दंड देना।
विशेष न्यायालय:
ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों का गठन करना ताकि त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सके।
पुनर्वास और मुआवजा:
पीड़ित पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुनर्वास और मुआवजे का प्रावधान।
गैर-जमानती अपराध:
पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता पर हमला एक गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाना चाहिए।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन का मानना है कि इन मांगों को पूरा करने से देश में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित मीडिया वातावरण बनाने में मदद मिलेगी, जो लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। एके बिंदुसार ने सरकार से इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर तत्काल ध्यान देने और उन्हें लागू करने का आग्रह किया है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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