शस्त्र के बिना न तो शास्त्र रक्षा हो सकती है और ना ही समाज की

बरेली। हिंदू जागरण मंच के ब्रज प्रांत के पूर्व महामंत्री डॉक्टर सुरेंद्र बागौर ने कहा कि बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की अराजकता और अनाचार के सामने मानवाधिकार आयोग जैसे संगठनों की चुप्पी इन संगठनों की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि कमजोर और असहाय की कोई भी मदद नहीं करता है इसलिए आज हिंदू समाज को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए स्वयं संगठित होकर आगे आना होगा।
अर्बन को ऑपरेटिव बैंक के सभागार में नाथ नगरी सुरक्षा समूह तत्वावधान में “हिंदू समाज के मानवाधिकार” विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में डॉक्टर सुरेंद्र बागौर ने कहा कि हमारे सभी देवी देवताओं के हाथ में शस्त्र और शास्त्र दोनों हैं, शस्त्र के बिना न तो शास्त्र रक्षा हो सकती है और ना ही समाज की। हिंदू समाज को भी जागरुक होकर अपनी रक्षा के हर कानून सम्मत उपाय पर गंभीरता से विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथियों को चाहे पाकिस्तान हो, अफगानिस्तान हो या फिर अब बांग्लादेश जहां भी मौका लगता है महिलाओं, बच्चों और आम लोगों पर अत्याचार करते हैं। उनकी धन संपत्ति को लूटते हैं, आग लगाते है और महिलाओं के साथ दुष्कर्म करते हैं‌। उनका लक्ष्य पूरे समाज का धर्म परिवर्तित कराकर उन्हें इस्लाम में शामिल करने का है। ऐसे में हमें ज्यादा सतर्कता से और एकजुटता के साथ इसका विरोध करना होगा। उनका कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और उनके अधिकारी भी कट्टरपंथियों से भयाक्रांत रहते हैं इसीलिए वे इनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करना तो दूर बयान देने से भी बचते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के समय दलित समाज के बड़े नेता जोगेंद्र नाथ मंडल जिन्ना के बहकावे में आ गए थे।‌ उनकी प्रभाव की वजह से हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग पाकिस्तान में रह गया। हालांकि उन्हीं बाबासाहेब भीमरावआंबेडकर ने उन्हें काफी समझाया लेकिन वह नहीं माने। देश का विभाजन होने के बाद यही जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान में हिंदुओं की बहन बेटियों के साथ हो रहे बलात्कार और अत्याचार को देख नहीं सके और भागकर भारत आ गए जबकि पाकिस्तान के संविधान निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका थी और वह पाकिस्तान के कानून मंत्री भी थे।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत कार्यवाह राजपाल जी ने कहा कि सन 1250 में बांग्लादेश में शत प्रतिशत हिंदू आबादी थी 18वीं सदी में यह घट कर 50 प्रतिशत रह गई, 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तो उस समय के पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांग्लादेश में तीस प्रतिशत हिंदू थे । इसके बाद सन 1971 में जब बांग्लादेश बना तो भी यहां 24 प्रतिशत हिंदू रह रहे थे लेकिन आज उनकी आबादी घटकर आठ प्रतिशत से भी कम रह गई है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के खिलाफ पूरी दुनिया में कुचक्र रचे जा रहे हैं। हमारी भारत माता जिसका क्षेत्रफल एक समय 90 लाख वर्ग किलोमीटर होता था वह आज 32 लाख वर्ग किलोमीटर गया है। हम सभी को आपसी भेदभाव भूलकर कट्टरपंथियों का मुकाबला करना है।
पंजाबी सेवा संगठन के संरक्षक अमरजीत सिंह बख्शी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी ने एक समय अपने परिवार का बलिदान देकर जनेऊ की रक्षा की थी आज फिर ऐसे लोगों को आगे आने की जरुरत है ताकि धर्म और समाज को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सिख समाज और हिंदू अलग-अलग नहीं हैं।
गोष्ठी का संचालन करते हुए नाथ नगरी सुरक्षा समूह के संयोजक दुर्गेश कुमार गुप्ता ने कहा कि हिंदू समाज हमेशा से शौर्य और पराक्रम का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियां भारत की बढ़ती ताकत देखकर परेशान हैं इसीलिए वे तरह तरह के षड्यंत्र रच रही हैं, हमें पूरी ताकत के साथ इसका जवाब देना है। उन्होंने कहा कि आज भारत में एक मजबूत सरकार है हमारे देश के प्रधानमंत्री को बांग्लादेश और दूसरी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं पर दबाव बनाना चाहिए ताकि बांग्लादेश में हिंदू की संपत्ति और जीवन की रक्षा हो सके।
कार्यक्रम की अंत में गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे रोटेरियन ज्ञानेंद्र गुप्ता ने सभी का धन्यवाद किया। गोष्ठी को पंडित के के शंखधार, चौधरी भगवानदास, राशि पाराशरी, शालिनी जौहरी, पवन अरोरा आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महानगर प्रचारक मयंक साधु, विवेक जी, लवलीन कपूर, धर्मेंद्र सचान, अमित बिश्नोई, अपुल श्रीवास्तव, विवेक अग्रवाल, अनुराग अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, नरोत्तम दास, नवीन कक्कड़, लोकेंद्र तोमर, रोहिताश्व, रामकुमार पाल, गोपाल शर्मा, अजय यादव, लाजपत राय, नीरज भारती, डॉ भरत गंगवार, नितिन राजपूत और विकास मेहरोत्रा आदि उपस्थित थे।
विकास सक्सेना
महानगर प्रचार प्रमुख
नाथ नगरी बरेली महानगर

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पं.सत्यम शर्मा

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