कहीं निजी धर्म कांटों के लाभ के लिए ही तो ठीक नहीं हो रहे मंडी में लगे कांटे?

दाल में काला: मंडी प्रशासन या निजी धर्म कांटे कोई तो हो रहा है उपकृत

कहीं निजी धर्म कांटों के लाभ के लिए ही तो ठीक नहीं हो रहे मंडी में लगे कांटे?


एटा। कृषि उत्पादन मंडी समिति में किसानों के खाद्यान्न की उचित तौल कराने के लिए दो-दो कांटों की व्यवस्था सरकार द्वारा दोनों मंडी गेटों पर की गई है लेकिन यह दोनों कांटे मंडी में लम्बे समय से खराब चल रहे हैं। अनेकों मंडी सचिव आए और चले गए पर किसी भी सचिव ने ऐसा प्रयास नहीं किया कि मंडी के दोनों सरकारी कांटे मरम्मत होकर खाद्यान्न की तौल कर सकते। कहीं मंडी परिषद के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा निजी धर्म कांटों के स्वामियों को किसी तरह उपकृत तो नहीं किया जा रहा है अथवा सरकारी कांटों के खराब रहने से मंडी प्रशासन को लाभ तो नहीं हो रहा है?
बताया गया है कि व्यापारियों की सांठगांठ के चलते सरकारी कांटों की मरम्मत के ठोस प्रयास नहीं किए जाते और बाहरी धर्म कांटों की तौल से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है जिससे किसान अनजान बना हुआ है। काश! मंडी के कांटे तौल करते तो हजारों ट्रेक्टरों की तौल में वसूला जाने वाला 50 रूपया प्रति ट्रेक्टर के हिसाब से लाखों रूपया प्रति दिन निजी धर्म कांटों की जेब नहीं जाता और खाद्यान्न की तौल के लिए किसानों का वाहन मंडी परिसर से बाहर निजी धर्म कांटों पर नहीं जाता तो सड़कों पर जाम भी नहीं लगता।
जिलाधिकारी महोदय से अपेक्षा है कि एटा में अपने रहते हुए मंडी परिसर में लगे कांटों को खाद्यान्न तौलने योग्य बना कर किसानों को उचित तौल और एटा-कानपुर और अलीगंज-फर्रुखाबाद मार्गों को जाम रहित होने का तोहफा अवश्य प्रदान करें।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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