दिल्ली में जैसे-जैसे जांच सुविधा बढ़ रही है संक्रमण की दर भी ज्यादा सामने आने लगी है… हर 12वां सैंपल +ive

दिल्ली में जैसे-जैसे जांच सुविधा बढ़ रही है संक्रमण की दर भी ज्यादा सामने आने लगी है… हर 12वां सैंपल +ive

**चार राज्यों में सबसे ज्यादा मरीज, दिल्ली में हर 12वां तो मध्य प्रदेश में 16वां सैंपल पॉजिटिव

चार बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा संक्रमित। राजधानी दिल्ली का आंकड़ा जापान के बराबर पहुंच चुका है। दिल्ली में 12 में से 1 सैंपल संक्रमित मिल रहा है तो जापान में 11.7 में से एक सैंपल पॉजीटिव मिल रहा है।
ठीक इसी तरह
मध्य प्रदेश में 16,
महाराष्ट्र 18 और
गुजरात में 19 सैंपल की जांच करने पर एक संक्रमित जरूर मिल रहा है।

जबकि राष्ट्रीय स्तर पर हर 24 में से एक सैंपल पॉजीटिव मिल रहा है।

दो दिन पहले ही भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दावा किया था कि भारत में 24 में से एक सैंपल संक्रमित मिल रहा है।
आईसीएमआर के ही मुताबिक…
जापान में 11.7,
इटली में 6.7,
अमेरिका में 5.3 और
ब्रिटेन में 3.4 सैंपल में से एक संक्रमित मिल रहा है।

बीते रविवार तक की स्थिति का आंकलन करें तो देश में 23 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में संक्रमण की दर सबसे अधिक है। सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज महाराष्ट्र और दिल्ली में हैं।

आईसीएमआर के अनुसार 3 से 18 अप्रैल के बीच संक्रमित मिल रहे सैंपल की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 3 अप्रैल तक हर दिन 5.73 फीसदी सैंपल संक्रमित मिल रहे थे। जबकि 9-16 अप्रैल के बीच यह आंकड़ा 2 से 3.4 फीसदी तक आ पहुंचा था लेकिन 17 व 18 अप्रैल को जांच की संख्या बढ़ी तो 6.07 फीसदी सैंपल हर दिन संक्रमित मिलने लगे। 18 अप्रैल को देश में 35494 सैंपल की जांच की गई थी जिसमें सर्वाधिक 2154 (6.07 फीसदी) सैंपल पॉजीटिव मिले थे।

देश में सबसे ज्यादा जांच दिल्ली में की जा रही है। 10 लाख की आबादी पर यहां 1330 लोगों की जांच हो रही है। जबकि मध्यप्रदेश में 311, महाराष्ट्र में 600, जम्मू-कश्मीर में 341 और गुजरात में 10 लाख लोगों पर 408 की जांच चल रही है। देश में अब तक 4.01 लाख जांच हो चुकी हैं जिनमें से 17615 लोगों के सैंपल पॉजिटिव मिल चुके हैं। इसके अनुसार 4.4 फीसदी सैंपल संक्रमित मिल रहे हैं। साथ ही 10 लाख में से 133 लोगों की जांच हो रही है।

विशेषज्ञों का दावा है कि जांच का दायरा बढ़ाने से संक्रमण की स्थिति और भी ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। दिल्ली एम्स के ही एक सामुदायिक मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर का मानना है कि ये काम बहुत पहले ही हर राज्य में शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन किट्स व लैब स्टाफ की पर्याप्त संख्या न होने के कारण दिक्कतें आई हैं। हालांकि अब, जब जांच का दायरा बढ़ रहा है तो मरीज की पहचान भी आसान होती जा रही है। समाज के बाकी लोगों की सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी भी है।

कुछ राज्यों ने शिकायत की है कि रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट से सटीक परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इस पर आईसीएमआर ने किट को 20 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में रखने का निर्देश दिया ताकि सटीक परिणाम मिलें। आईसीएमआर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया, अभी तक यह पता नहीं चला है कि एंटीबॉडी टेस्ट कितना शक्तिशाली होगा? इसका इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि बीजीआर अमेरिका एफडीए लैब से मान्य प्राप्त किट्स हैं। ये ज्यादा तापमान पर काम नहीं कर पातीं।

पूर्वोत्तर राज्यों में कोरोना हारता दिख रहा है। मणिपुर व अरुणाचल प्रदेश के कोरोना मुक्त होने के बाद असम भी इसी राह पर है। वहीं त्रिपुरा में हालात नियंत्रण में है। इन राज्यों ने न सिर्फ लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया, बल्कि कोरोना संदिग्धों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की।

असम और त्रिपुरा में बीते कुछ दिन से एक भी नया मरीज नहीं मिला है। असम में 34 मरीजों की पहचान हुई थी, जिनमें से 18 को छुट्टी मिल चुकी है। वहीं, 15 को भी जल्द छुट्टी मिलने की उम्मीद है। राज्य में सिर्फ एक मौत हुई है। त्रिपुरा में दो ही संक्रमित मिले थे और दोनों तेजी से ठीक हो रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आरोप लगाया, तब्लीगी जमात से कोरोना ने दस्तक दी थी। तेजी से लोगों की पहचान कर इन्हें समाज से अलग किया।

फिर करीब 5000 लोगों की कोरोना जांच की गई। इनमें 34 कोरोना पॉजिटिव निकले।

About The Author

Team KNLS Live

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks