
23 विधायकों, एमएलसी और सांसदों ने नियम-विरुद्ध ढंग से करोड़ों रुपये अपनी विधायक व सांसद निधि से जौहर विश्वविद्यालय के सुपुर्द की
लखनऊ, । पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय की जांच कर रहे आयकर विभाग को बहुत ही हैरतअंगेज प्रमाण मिले हैं। पता चला है कि सपा सरकार में रहे 23 विधायकों, एमएलसी और सांसदों ने नियम-विरुद्ध ढंग से करोड़ों रुपये अपनी विधायक व सांसद निधि से जौहर विश्वविद्यालय के सुपुर्द कर दी। अब आयकर विभाग ने राज्य सरकार के 106 करोड़ रुपये लगाने वाले छह विभागों को नोटिस जारी कर दस्तावेज़ मांगे हैं। साथ ही उन्हें नोडल अधिकारी बनाने को कहा है ताकि दस्तावेज सुपुर्द करने में असुविधा न हो।
आयकर विभाग को जांच में पता चला है कि जौहर विश्वविद्यालय बनाने के लिए सरकारी खजाने की जमकर लूट की गई। तमाम सांसद, विधायक व एमएलसी आज़म खां के जौहर विश्वविद्यालय पर इस कदर मेहरबान थे कि उन्होंने बेझिझक अपनी सांसद व विधायक निधि से कई -कई बार लाखों की रकम उन्हें दी। आयकर विभाग ने राज्य सरकार से इन धनराशियों से जुड़े शासनादेश मांगे हैं। आयकर अधिकारी जानना चाहते हैं कि इसे जारी करने के लिए किसी अधिकारी की अहम भूमिका रही। पीडब्ल्यूडी, जल निगम, सीएंडडीएस, ग्राम्य विकास, संस्कृति विभाग को नोटिस जारी किया गया है।
उनसे जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं और सभी विभागों से आयकर विभाग से समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी तैनात करने को कहा गया है।
अपने ही विश्वविद्यालय में दे दी निधि
हैरत यह कि राज्यसभा सांसद रहीं तंजीम फातिमा ने अपने ही निजी विश्वविद्यालय को 22 लाख रुपये दे दिए। नियमत यह रकम वह किसी निजी संस्थान को जारी नहीं कर सकती थीं। बाद में यह रकम भी लौटाई गई।
अपनी निधि देने वाले विधायक व एमएलसी
रकम देने वालों में—- विधायकों-एमएलसी में सरोजनी अग्रवाल 1.15 करोड़, राजेंद्र चौधरी 30 लाख, मधु गुप्ता 30 लाख, बलराम यादव 15 लाख, यशवंत सिंह 20 लाख, बुक्कल नवाब 50 लाख, रमेश यादव 10 लाख, राम सुंदर दास 30 लाख, विजय यादव 20, अंबिका चौधरी 25 लाख, अहमद हसन 10 लाख, लीलावती कुशवाहा 50 लाख, अशोक वाजपेयी 25 लाख, राम सकल गुर्जर 10 लाख, तंजीम फात्मा 22 लाख, रामजतन राजभर 10 लाख, एमएलसी बनवारी सिंह ने 10 लाख रुपये अपनी विधायक निधि से दिए।
अग्रिम जमानत को कोर्ट पहुंचे आजम और अब्दुल्ला
रामपुर। सपा के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खांव उनके बेटे एवं पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर से नगर पालिका की मशीनें बरामद होने के मामले अग्रिम जमानत के लिए शुक्रवार को कोर्ट में अर्जी लगाई है। अदालत ने उसुनवाई के लिए तीन अक्तूबर की तारीख मुकर्रर की है। मालूम हो कि पूर्व में अब्दुल्ला आजम खां के दोस्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
जारी दिशानिर्देशों के अनुसार यह है नियम
मुख्य सचिव द्वारा जारी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के दिशानिर्देशों के मुताबिक, नियम यह है कि कोई भी सांसद-विधायक वाणिज्यिक संगठनों, निजी संस्थाओं अथवा सरकारी संस्थानों में सांसद निधि के तहत कार्य नहीं करवा सकता। आयकर की जांच में पाया गया है कि इन सभी विधायकों-एमएलसी ने नियम विरुद्ध धनराशि जौहर विश्वविद्यालय को दी।