वह दिन ज्यादा दूर नहीं, जब चीनी भाषा को पछाड़कर हिंदी शीर्ष पर पहुंच जाएगी

हमें इसी आलोक में 14 सितंबर (हिंदी दिवस) को देखना चाहिए
वह दिन ज्यादा दूर नहीं, जब चीनी भाषा को पछाड़कर हिंदी शीर्ष पर पहुंच जाएगी

हिंदी को न केवल अपने देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पर्याप्त सम्मान मिलता रहा है। हर भारतवासी के लिए यह गौरव का विषय होना चाहिए कि आज दुनिया के 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी एक विषय के रूप में गंभीरता से पढ़ाई जाती है। हिंदी वहां अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान की भाषा बन चुकी है। अमेरिका के ही 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में भाषायी पाठॺक्रमों में हिंदी को महत्वपूर्ण दर्जा मिला हुआ है। फिजी में तो हिंदी को आधिकारिक दर्जा हासिल है। यह पूरी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। अमेरिका के अलावा यूरोपीय देश, एशियाई देश और खाड़ी के मुल्कों में भी इस भाषा का तेजी से विकास हुआ है। यह अनवरत आगे बढ़ रही है। रूस के कई विश्वविद्यालयों में तो हिंदी साहित्य पर लगातार शोध हो रहे हैं।

विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, हिंदी विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। लैंग्वेज यूज इन यूनाइटेड स्टेट्स, 2011 नामक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हिंदी अमेरिका में बोली जाने वाली शीर्ष दस भाषाओं में से एक है, जहां इसे बोलने वालों की संख्या साढ़े छह लाख से भी अधिक है। दुनिया भर में हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता का ही असर है कि वर्ष 2017 में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी पहली बार ‘अच्छा’, ‘बड़ा दिन’, ‘बच्चा’ और ‘सूर्य नमस्कार’ जैसे हिंदी शब्दों को सम्मिलित किया गया। तकनीकी रूप से हिंदी को और ज्यादा उन्नत, समृद्ध और आसान बनाने के लिए अब कई सॉफ्टवेयर भी बनने लगे हैं, जिसका सकारात्मक लाभ इस भाषा को मिला है।
बेशक, 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है, लेकिन 14 सितंबर का अपना महत्व है। आज हमारे देश में ही कुछ लोग हिंदी के उपयोग को लेकर कभी-कभी बेवजह का विवाद खड़ा कर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास करते दिखते हैं, लेकिन हर भारतीय के लिए गर्व की बात यह है कि दुनिया भर में अब हिंदी को चाहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हिंदी एक ऐसी भाषा बन गई है, जो प्रत्येक भारतीय को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाती है। दुनिया भर में आज 75 करोड़ से भी ज्यादा लोग हिंदी बोलने लगे हैं और जिस प्रकार वैश्विक परिदृश्य में इस भाषा की स्वीकार्यता निरंतर बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह कहना असंगत नहीं होगा कि वह दिन ज्यादा दूर नहीं, जब चीनी भाषा को पछाड़कर हिंदी शीर्ष पर पहुंच जाएगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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