मेडिकल कॉलेज है या शोपीस

,मेडिकल कॉलेज है या शोपीस—
एटा मेडिकल कॉलेज सर्दी जुकाम मलेरिया जैसे नाम से प्रसिद्ध है, अभी तक सीरियस बीमारी के लिए हम बाहर के मोहताज है क्या किया जाए मजबूरियां ऐसी हो जाती है कभी कभी कि बीमार की जान बचाने के लिये रात हो या दिन जब मुशीबत पड़ती है तो बाहर जाना ही पड़ता है घोषणाएं समय पर हो जाए तब सुर्खियां बने तो ज्यादा अच्छा लगता है लेकिन इन सब बातों की बार-बार याद दिलाई जाती है यह सिर्फ और सिर्फ वोट की राजनीति बन जाती है वोट अगर आप पर भरोसा करता है तो उसके भरोसे को तोड़ना किसी भी सरकार को भारी पड़ सकता है फिर चाहे सरकार किसी की भी क्यों न हो ट्रेन अभी देखो कितने दिन तक सुर्खियों में चले सीवर लाइन शहर की सड़कें शहर में ऐसा क्या है आज की बदलती दुनियां में हम आसमान पर पहुंच गए और शहर में जो चीजें थी वह भी गायब हो गई बच्चों की छुट्टियां चल रही है परिवार बाहर जा रहे हैं अपने बच्चों को मनोरंजन हेतु–चलिए पैसे वाले लोग तो यह सब कर लेंगे लेकिन पूछिए वह गरीब बच्चों से गरीब परिवारों से कि वह अपने बच्चों को छुट्टियों में कहां कहां ले जा रहे हैं और उनका दिल बहला रहे हैं एटा शहर में ऐसा कोई स्थल नहीं है मनोरंजन के नाम पर या पर्यटक के नाम पर जहां सुबह से साम तक इस व्यस्ततम लाइफ में कहीं बैठकर अपनी जीवन और मन की थकान दूर कर सके पब्लिक, अगर कोई पार्क या बैठने लायक जगह है भी तो नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है ऐसा नहीं है कि शुरू मे इस शहर में कुछ नहीं था चिड़ियाघर भी था चार चार सिनेमा हॉल लेकिन आज वह नजर नहीं आते चिड़ियाघर भैंसों का तबेला बन गया उसी में एक वीरांगना की दलदल में मूर्ति लगी हुई है लेकिन जयंती और पुण्यतिथि आए तो फूल मालाएं चढ़ाने से हम नहीं चूकते है क्योंकि अपने चेहरे जो चमकाने है धूल फांकती मूर्तियां पूर्व शहीदों की कर्मठ देश के पुत्रों की बहुत कुछ मांगती और कहती है कि हमारा बलिदान व्यर्थ गया देश के टुकड़े टुकड़े करने से आज कोई भी धर्म नहीं चूक रहा है किताबें इतिहास की जो रखी है अलमारियों में आज पन्ने पन्ने फाड़ कर आज धर्म उनके लिए जा रहे कुछ न करने का हौसला रखने वाले यह धर्म अपने पूर्वजों की बलिदानों की धज्जियां उड़ा रहे हैं काम जब धरा पर हो तब बोले तो करनी और कथनी पर गर्व होता है सुनने मे अच्छा लगता है लेकिन घोषणाएं जब काम से परे बार बार दोहराई जाती है जो शर्मनाक हो जाती है क्योंकि समय पर होने वाली चीजें सराहनीय होती है।
लेखिका, पत्रकार, दीप्ति चौहान।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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