
इस वक्त तो पूरे प्रदेश में चालक उत्पीड़न शोषण और लूट का शिकार
लखनऊ,ऐसी परिस्थिति मैं सब करीब-करीब 7 प्रदेशों और 50 से अधिक उत्तर प्रदेश के जिलों में चालकों की आकलन करने के बाद खास करके मैंने शहर में चलने वाली छोटी गाड़ियों का ज्यादा सर्वे किया हो और ज्यादा चालकों से मिला कहीं भी खास करके उत्तर प्रदेश चालकों के लिए कोई व्यवस्था नहीं।
जिस दिन चालक एजेंसी से गाड़ी निकालता उसी दिन से शोषण और लूट का शिकार हो जाता है। कंपनी से ही इन्हें लूटने का व्यवस्था बना दी गई है। उदाहरण के तौर पर बनारस ऑटो रिक्शा जब एजेंसी से निकाली जाती है एजेंसी उससे ₹28500 पेपर के नाम पर लेती है और पेपर बनवाने में कितना खर्च आता है यह आप लोग खुद आरटीओ ऑफिस में आरटीआई लगाकर पूछ सकते हैं। लम सम 5 से ₹6000 पेपर के नाम पर ही लूट हो जाती है।
इनके लिए सरकार द्वारा आज तक कोई भी योजना व्यवस्था लाभ है ही नहीं न कोई सरकार ने कोई लाभ देती। नगर निगम और अन्य विभाग सिर्फ एक लाभ मिलता है। सिस्टम के नाम पर वसूली के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाना कोई नगर निगम के नाम पर लूट, कोई यूनियन के नाम पर, कोई यातायात पुलिस के नाम पर, कोई स्टैंड संचालक के नाम पर, बस इनको लूटना ऐसी परिस्थि में।