
“लाखों वसूले और बिना नेट बनाए असिस्टेंट प्रोफेसर
?? विनय पाठक के 8 माह के कार्यकाल में नियुक्ति-संबद्धता में भी खेल”
आगरा, कार्यालय संवाददाता। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक अनुमोदन में जमकर खेल हुआ। इसी अनुमोदन के सहारे विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को संबद्धता बांट दी। इसमें कॉलेजों की संबद्धता अस्थायी से स्थायी करना भी शामिल था। जबकि संबद्धता के पहले चरण पर ही बड़ा खेल हो गया था। विवि के जिम्मेदारों की मिलीभगत का प्रमाण यह था कि अनुमोदन में हुए खेल की शिकायत के बाद भी विवि ने जांच तो दूर शिकायत ही दबा दी। तुर्रा यह कि अनुमोदन और संबद्धता की प्रक्रिया लगातार चलती रही।
विवि से संबद्ध महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नेशनल एलिजिबिटी टेस्ट(नेट) के फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे कई अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर बने। नेट प्रमाण पत्र के जरिए चल रहा खेल जून में पकड़ भी लिया गया था। उस समय विवि के कुलपति पद की जिम्मेदारी प्रो. विनय पाठक ही संभाल रहे थे। मथुरा के एक कॉलेज में शिक्षक नियुक्ति के आवदेन करने वाले दो अभ्यर्थियों के नेट प्रमाण पत्र का खेल कम्प्यूटर साइंस के एक्सपर्ट ने पकड़ लिया था। इसमें नेट का फर्जी प्रमाण पत्र प्रयोग किया गया था। फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे अनुमोदन के खेल की शिकायत विश्वविद्यालय से की गयी। तत्कालीन इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के निदेशक ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की और इसके लिए विवि कुलपति, कुलसचिव को पत्र लिखा। मगर विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने पत्र को दबा दिया।