बेटे ने  निभाया फर्ज : दिया जीवनदान , बची पुलिस अधिकारी पिता की जिंदगी

बरेली – सेवा, त्याग और पारिवारिक समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के 52 वर्षीय उपनिरीक्षक को उनके 26 वर्षीय बेटे ने लिवर का हिस्सा दान कर नया जीवन दिया। यह सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT) मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में किया गया।

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) सुभाष गुप्ता, ग्रुप चेयरमैन, सेंटर फॉर लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली एवं साकेत ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ किया। टीम में डॉ. राजेश डे, डायरेक्टर – लिवर ट्रांसप्लांट एवं बिलियरी साइंसेज, रोबोटिक सर्जरी एवं पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट भी शामिल थे।

बरेली निवासी डॉ. (पीएचडी) भारत सिंह, जो एक सम्मानित पुलिस अधिकारी, शिक्षक और मार्गदर्शक हैं, पिछले एक दशक से गंभीर लिवर रोग से जूझ रहे थे। वर्ष 2012 में उन्हें नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का पता चला था। समय के साथ उनकी बीमारी बढ़ती गई और उन्हें पीलिया सहित कई गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक उपचार के बावजूद उनकी लिवर कार्यक्षमता लगातार गिरती रही। वर्ष 2024 में चिकित्सकों ने उन्हें लिवर प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी।

परिवार ने व्यापक शोध और विशेषज्ञ परामर्श के बाद मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली को चुना। जब चिकित्सकों ने लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट की संभावना बताई, तो उनके छोटे बेटे अभिषेक सिंह ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने लिवर का हिस्सा दान करने का निर्णय लिया। पेशे से अधिवक्ता और न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे अभिषेक बरेली में एक कोचिंग संस्थान भी संचालित करते हैं।

मामले की जानकारी देते हुए डॉ. राजेश डे ने बताया कि मरीज गंभीर MASH से संबंधित क्रॉनिक लिवर डिजीज से पीड़ित थे और लिवर फेल्योर से जुड़ी गंभीर जटिलताएं विकसित हो चुकी थीं। विस्तृत जांच के बाद लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें बेटे द्वारा दान किया गया 902 ग्राम वजनी लिवर का दायां भाग प्रत्यारोपित किया गया। पूरी प्रक्रिया में विभिन्न विशेषज्ञताओं वाली चिकित्सकीय टीम ने मिलकर काम किया।

सर्जरी पूरी तरह सफल रही और प्रत्यारोपण के बाद मरीज की लिवर कार्यक्षमता में लगातार सुधार हुआ। डॉ. भारत सिंह को सर्जरी के 21 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि अभिषेक को 10 दिन बाद स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किया गया।

प्रो. (डॉ.) सुभाष गुप्ता ने कहा, “लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम है। इस मामले में बेटे के निस्वार्थ निर्णय ने अपने पिता की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय पर विशेषज्ञ उपचार और मजबूत पारिवारिक सहयोग से आज लिवर प्रत्यारोपण के उत्कृष्ट परिणाम संभव हो रहे हैं।”

अपने अनुभव साझा करते हुए अभिषेक सिंह ने कहा, “मैंने हमेशा अपने पिता को दूसरों की सेवा करते देखा है। एक पुलिस अधिकारी, शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित किया है। जब मुझे पता चला कि मैं उनकी जान बचा सकता हूं, तो मेरे मन में कोई संकोच नहीं था। इस फादर्स डे पर मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैं उन्हें जीवन का सबसे बड़ा उपहार दे सका।”

स्वस्थ होने के बाद डॉ. भारत सिंह ने भावुक होकर कहा, “एक पुलिस अधिकारी के रूप में मैंने हमेशा लोगों की रक्षा की है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मेरा अपना बेटा मेरा रक्षक बनेगा। मुझे केवल नया लिवर ही नहीं, बल्कि नया जीवन मिला है। मैं अपने बेटे और मैक्स अस्पताल की पूरी टीम का हृदय से आभारी हूं, जिन्होंने मुझे मेरे परिवार, सेवा और समाज के प्रति मेरे मिशन में वापस लौटने का अवसर दिया।”

यह सफल प्रत्यारोपण उन्नत लिवर उपचार और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली की विशेषज्ञता को रेखांकित करता है। अनुभवी ट्रांसप्लांट टीम, अत्याधुनिक तकनीक और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ अस्पताल जटिल लिवर रोगों से जूझ रहे मरीजों को नई उम्मीद प्रदान कर रहा है।

About The Author

पं.सत्यम शर्मा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks