जीवन में भरत जैसे भाई का होना बहुत जरूरी ~ शिवानंद जी महाराज

बरेली :: श्री रामायण मंदिर माधव बाड़ी में चल रही दिव्य श्रीराम कथा के सप्तम दिवस पर नैमिषारण्य से पधारे भाई श्री शिवानन्द जी ने भरत के राम के प्रति भातृ प्रेम को बताया
गोस्वामी तुलसीदास महाराज द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्या काण्ड में वर्णित भगवान श्रीराम के वन गमन के प्रसंग के तहत भरत चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने भरत के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम और वात्सल्य भाव के कई प्रसंग सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया।

उन्होंने कहा कि भरत ने राजतिलक का परित्याग कर भातृ प्रेम की अनूठी मिसाल पेश कर समाज को जो संदेश दिया, वह आज लोग भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और हमें लोभ लालच न कर प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा देती है। रामायण में भरत ही एक ऐसा पात्र है, जिसमें स्वार्थ व परमार्थ दोनों को समान दर्जा दिया गया। इसलिए भरत का चरित्र अनुकरणीय है। भरत चरित्र का प्रत्येक प्रसंग धर्म सार है क्योंकि भरत का सिद्धांत लक्ष्य की प्राप्ति व राम के प्रेम को दर्शाता है।

कथा के दौरान प्रसंग के माध्यम से महाराज श्री ने बताया कि भ्रातृत्व प्रेम किसी का है तो वह भरत का। वर्तमान समय में भरत चरित्र की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। स्वार्थ के कारण आज भाई-भाई जहां दुश्मन जैसा व्यवहार करते हैं, वहीं भरत चरित्र त्याग, संयम, धैर्य और ईश्वर प्रेम का दूसरा उदाहरण है। भरत का विग्रह श्रीराम की प्रेम मूर्ति के समान है। जिससे भाई के प्रति प्रेम की शिक्षा मिलती है। इस मनुष्य जीवन में भाई व ईश्वर के प्रति प्रेम नहीं है, तो वह जीवन पशु के समान है। कहा कि सभी को भरत और श्रीराम से भाई व ईश्वर प्रेम की सीख लेनी चाहिए।
कथा के साथ ही मंदिर परिसर में हरियाली तीज का महोत्सव ठाकुर जी के साथ बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया इस अवसर पर सभी ने हरित वस्त्र धारण कर महिलाओं ने मंगल गीत गाकर तीज का त्योहार बड़े ही जोर शोर से मनाया ।।

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पं.सत्यम शर्मा

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